देश की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजुकी ने एक बार फिर अपनी कारों की कीमतें बढ़ा दी हैं। सितंबर से चुनिंदा मॉडलों की कीमत में 20,000 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है। यह चार महीने में कंपनी की तीसरी मूल्य वृद्धि है।
इस साल कितनी बढ़ोतरी हो चुकी
कंपनी की मूल्य वृद्धि का क्रम इस प्रकार रहा:
• जून: 30,000 रुपये तक की बढ़ोतरी
• अगस्त: 30,000 रुपये तक की बढ़ोतरी
• सितंबर: 20,000 रुपये तक की बढ़ोतरी
मॉडल और वेरिएंट के अनुसार इस साल कुल संचयी बढ़ोतरी 80,000 रुपये तक पहुंच गई है।
इस बार सीमित दायरा
एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि पिछली दो बढ़ोतरियां लगभग पूरी मारुति सुजुकी रेंज पर लागू हुई थीं। इस बार बढ़ोतरी सिर्फ चुनिंदा मॉडलों और वेरिएंट पर लागू होगी।
इसका मतलब यह है कि हर मारुति कार महंगी नहीं हुई है। खरीदारी की योजना बना रहे ग्राहकों को डीलरशिप पर अपने विशिष्ट वेरिएंट की नई कीमत जांचनी चाहिए।
कंपनी ने क्या कारण बताया
कंपनी ने बढ़ोतरी के लिए लगातार बनी महंगाई के दबाव और प्रतिकूल लागत परिस्थितियों को जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही कहा गया है कि आंतरिक लागत घटाने के उपायों के जरिए अतिरिक्त लागत का एक हिस्सा खुद वहन करने की कोशिश की गई है।
कीमत क्यों बढ़ती है
वाहन निर्माताओं की लागत मुख्य रूप से तीन जगहों से बढ़ती है।
कच्चा माल: स्टील, एल्युमीनियम, तांबा और प्लास्टिक-आधारित घटक। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर प्लास्टिक और रबर से जुड़े पुर्जे महंगे होते हैं।
नियामकीय आवश्यकताएं: सुरक्षा और उत्सर्जन मानकों में बदलाव पर नए उपकरण जोड़ने पड़ते हैं, जिनकी लागत कीमत में जुड़ती है।
आपूर्ति शृंखला: आयातित पुर्जों की लागत विनिमय दर और परिवहन खर्च से प्रभावित होती है।
खरीदारों के लिए इसका मतलब
त्योहारी सीजन नजदीक है, जो भारत में कार बिक्री का सबसे बड़ा दौर होता है। ऐसे में मूल्य वृद्धि का समय ग्राहकों के लिए प्रतिकूल है।
हालांकि व्यावहारिक रूप से त्योहारों के दौरान डीलरशिप स्तर पर छूट, एक्सचेंज बोनस और कॉर्पोरेट डिस्काउंट भी बढ़ते हैं। इसलिए सूचीबद्ध कीमत में बढ़ोतरी का असर अंतिम भुगतान में उतना सीधा नहीं दिखता।
खरीदते समय ऑन-रोड कीमत की पूरी गणना देखना जरूरी है, जिसमें एक्स-शोरूम कीमत के अलावा पंजीकरण, बीमा और अन्य शुल्क शामिल होते हैं।
उद्योग की बड़ी तस्वीर
मूल्य वृद्धि सिर्फ मारुति तक सीमित नहीं है। लागत का दबाव पूरे उद्योग पर है, और अन्य निर्माता भी समय-समय पर कीमतें संशोधित करते रहे हैं।
दूसरी ओर, यह ऐसे समय हो रहा है जब भारतीय कार बाजार में ईंधन के विकल्पों को लेकर बड़ा बदलाव चल रहा है — सीएनजी, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है। बढ़ती कीमतें इस बदलाव को और तेज कर सकती हैं, क्योंकि खरीदार चलाने की लागत पर ज्यादा ध्यान देने लगते हैं।