सरकार फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देकर पेट्रोल पर निर्भरता और आयात बिल कम करने की रणनीति पर काम कर रही है।
केंद्र सरकार फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर के अनुसार यह कदम पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक क्या है?
ऐसे इंजन पेट्रोल और एथेनॉल के अलग-अलग अनुपात वाले मिश्रण पर चल सकते हैं। इससे वाहन मालिकों को ईंधन विकल्प मिलता है, लेकिन बड़े पैमाने पर उपयोग के लिए वाहन अनुकूलता, ईंधन उपलब्धता और कीमतों की स्पष्ट जानकारी जरूरी होगी।
ग्राहकों और उद्योग पर असर
वाहन कंपनियों को इंजन कैलिब्रेशन, सामग्री और सर्विस नेटवर्क में बदलाव करने पड़ सकते हैं। उपभोक्ताओं के लिए असली फायदा तभी स्पष्ट होगा जब माइलेज, वारंटी और ईंधन लागत का तुलनात्मक डेटा सामने आए। फिलहाल इसे नीति की दिशा माना जाना चाहिए, तत्काल अनिवार्यता नहीं।
स्रोत: Economic Times
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