भारतीय कार बाजार में एक ऐतिहासिक बदलाव दर्ज किया गया है। अगस्त 2026 में पहली बार वैकल्पिक ईंधन वाले वाहनों ने सामूहिक रूप से पेट्रोल कारों को पीछे छोड़ दिया।
आंकड़े क्या कहते हैं
अगस्त में यात्री वाहन पंजीकरण में हिस्सेदारी इस प्रकार रही:
• सीएनजी/एलपीजी: 25.28 प्रतिशत
• हाइब्रिड: 9.04 प्रतिशत
• इलेक्ट्रिक: 7.63 प्रतिशत
• कुल वैकल्पिक ईंधन: 41.95 प्रतिशत
इसके मुकाबले पेट्रोल और एथेनॉल वाहनों की हिस्सेदारी 40.85 प्रतिशत रही।
यहां एक बारीकी समझनी जरूरी है — पेट्रोल अब भी सबसे बड़ी एकल ईंधन श्रेणी बनी हुई है। बदलाव यह है कि तीन वैकल्पिक श्रेणियों को मिलाकर देखने पर वे पेट्रोल से आगे निकल गई हैं।
एक साल में कितना बदलाव
पिछले साल की तुलना करने पर बदलाव की गति साफ दिखती है। अगस्त 2025 में वैकल्पिक ईंधनों की संयुक्त हिस्सेदारी 35.26 प्रतिशत थी, जबकि पेट्रोल/एथेनॉल की हिस्सेदारी 46.37 प्रतिशत थी।
यानी एक साल में वैकल्पिक ईंधनों ने करीब 6.7 प्रतिशत अंक की बढ़त हासिल की, और पेट्रोल की हिस्सेदारी लगभग साढ़े पांच प्रतिशत अंक घटी।
यह बदलाव क्यों हो रहा है
रिपोर्ट्स के अनुसार इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं।
चलाने की लागत: ईंधन की ऊंची कीमतें खरीदारों को प्रति किलोमीटर खर्च के बारे में ज्यादा सोचने पर मजबूर कर रही हैं। सीएनजी और इलेक्ट्रिक, दोनों इस मोर्चे पर पेट्रोल से सस्ते पड़ते हैं।
E20 को लेकर चिंता: पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ने को लेकर कुछ उपभोक्ताओं में माइलेज और पुराने वाहनों पर असर को लेकर सवाल रहे हैं, जिसने भी विकल्पों की ओर रुझान बढ़ाया है।
ज्यादा विकल्प: पहले सीएनजी और इलेक्ट्रिक में मॉडल सीमित थे। अब लगभग हर लोकप्रिय श्रेणी में कई विकल्प उपलब्ध हैं, जिससे खरीदार को समझौता कम करना पड़ता है।
खरीदार के लिए इसका मतलब
अगर आप नई कार खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह बदलाव आपके लिए भी प्रासंगिक है। तीनों विकल्पों का गणित अलग है।
सीएनजी: चलाने की लागत सबसे कम, लेकिन बूट स्पेस घटता है और पंप का नेटवर्क अब भी हर जगह समान नहीं है। ज्यादा दौड़ने वालों के लिए सबसे उपयुक्त।
हाइब्रिड: कोई चार्जिंग की जरूरत नहीं, शहर में बेहतर माइलेज। शुरुआती कीमत अधिक होती है, इसलिए फायदा तभी है जब सालाना दौड़ अच्छी हो।
इलेक्ट्रिक: चलाने की लागत सबसे कम, लेकिन घर या दफ्तर में चार्जिंग की सुविधा होना लगभग अनिवार्य शर्त है।
आगे क्या
यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बदलाव एक महीने की घटना है या स्थायी रुझान। त्योहारी सीजन के आंकड़े इस सवाल का बेहतर जवाब देंगे, क्योंकि साल की सबसे ज्यादा बिक्री उसी दौरान होती है।