स्मार्टफोन खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए यह जानना जरूरी है कि इस साल कीमतें क्यों बढ़ रही हैं। इसकी वजह कोई सामान्य महंगाई नहीं, बल्कि एक वैश्विक मेमोरी चिप संकट है, जिसकी जड़ें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की तेज मांग में हैं।
संकट की जड़ क्या है
मामला आपूर्ति और प्राथमिकता का है। मेमोरी चिप बनाने वाली कंपनियां अपनी उत्पादन क्षमता का बड़ा हिस्सा अब हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) की ओर मोड़ रही हैं, जिसका इस्तेमाल एआई डेटा सेंटर में होता है।
इसका सीधा नतीजा यह है कि उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स — यानी फोन, लैपटॉप और टीवी — में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक चिप का उत्पादन प्राथमिकता में पीछे चला गया है।
आंकड़े इस दबाव को स्पष्ट करते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार 2026 की पहली तिमाही में पारंपरिक DRAM के अनुबंध मूल्य में तिमाही आधार पर 90 से 95 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का अनुमान था, जबकि NAND फ्लैश की कीमतों में 55 से 60 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया।
भारत में क्या असर दिख रहा है
IDC के अनुमान के अनुसार 2026 में स्मार्टफोन की औसत खुदरा कीमत में करीब 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है।
भारतीय बाजार में यह असर पहले ही दिखने लगा है। रिपोर्ट्स के अनुसार iQOO Z10 और Vivo T4 5G जैसे मॉडलों की कीमतों में करीब 2,000 रुपये की बढ़ोतरी हुई, जबकि iQOO Z10x और Vivo T4x 5G में 1,500 से 2,500 रुपये तक की वृद्धि दर्ज की गई।
सबसे ज्यादा असर बजट फोन पर क्यों
यह इस संकट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। महंगे फ्लैगशिप फोन में मेमोरी की लागत कुल कीमत का अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा होती है, इसलिए उस पर बढ़ोतरी का असर सीमित रहता है।
लेकिन 10,000 से 20,000 रुपये वाले फोन में मेमोरी की लागत का हिस्सा कहीं बड़ा होता है। इसलिए वही खरीदार सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, जिनके लिए कीमत सबसे बड़ा कारक है।
कंपनियां क्या कर रही हैं
कीमत बढ़ाने के अलावा कंपनियां एक और रास्ता अपना रही हैं — स्पेसिफिकेशन में कटौती।
रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ ब्रांड कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले और ऑडियो घटकों की गुणवत्ता घटा रहे हैं। कुछ मामलों में बेस मॉडल को वापस 4GB रैम पर लाया जा रहा है — यह ऐसा स्तर है जो 2020 के बाद से नहीं देखा गया था।
खरीदार के लिए यह ज्यादा चिंताजनक स्थिति है, क्योंकि कीमत वही दिखती है लेकिन मिलने वाला उत्पाद कमजोर होता है।
खरीदार क्या करें
इस माहौल में कुछ व्यावहारिक बातें उपयोगी रहेंगी:
स्पेसिफिकेशन ध्यान से पढ़ें: उसी मॉडल का नया बैच पुराने से अलग हो सकता है। रैम और स्टोरेज की पुष्टि जरूर करें।
जरूरत से ज्यादा स्टोरेज न लें: ज्यादा स्टोरेज वाले वेरिएंट में कीमत का अंतर इस बार सामान्य से अधिक हो सकता है।
मौजूदा फोन को थोड़ा और चलाना विकल्प है: अगर आपका फोन ठीक काम कर रहा है, तो इस दौर में अपग्रेड टालना आर्थिक रूप से समझदारी हो सकती है। बैटरी बदलवाना अक्सर नए फोन से कहीं सस्ता पड़ता है।
आगे क्या
यह संकट कब तक चलेगा, यह इस पर निर्भर करता है कि एआई डेटा सेंटर की मांग कब स्थिर होती है और मेमोरी निर्माता नई क्षमता कब जोड़ते हैं। सेमीकंडक्टर उद्योग में नई क्षमता तैयार होने में आमतौर पर लंबा समय लगता है, इसलिए तत्काल राहत की उम्मीद कम है।