दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने से सात लोगों की मौत हो गई। यह इमारत दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास एक संकरी गली में थी और इसमें लड़कों का पेइंग गेस्ट (PG) हॉस्टल चल रहा था। हादसा रविवार दोपहर हुआ। राहत कार्य के दौरान कुल 12 लोगों को मलबे से निकाला गया, जिनमें से छह को बचाया नहीं जा सका।
करीब 50 साल पुरानी इमारत
गिरी हुई इमारत करीब 50 साल पुरानी बताई जा रही है। बचाव कार्य में सबसे बड़ी चुनौती यह रही कि आसपास की इमारतें भी 40 से 50 साल पुरानी हैं और उनमें से कई बिना पिलर वाली हैं। खराब हालत को देखते हुए राहत दल को पड़ोस की इमारतों के नीचे अस्थायी कॉलम खड़े करने पड़े, ताकि बचाव के दौरान वे भी न गिर जाएं।
संकरी गलियों ने भी काम मुश्किल किया। भारी मशीनें मौके तक पहुंचाना आसान नहीं था, जिससे मलबा हटाने में समय लगा।
मकान मालिक, पत्नी और बेटा गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने पीजी संचालक, उनकी पत्नी और बेटे को गिरफ्तार किया है। इससे पहले मकान मालिक हरि राम के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया था। मामले में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।
हाईकोर्ट ने डीयू और एमसीडी को भी जिम्मेदार माना
हाईकोर्ट ने इस मामले में सिर्फ मकान मालिक तक जिम्मेदारी सीमित नहीं रखी। अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की भूमिका पर भी सवाल उठाए। यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सत्य निकेतन जैसे इलाकों में पीजी का पूरा कारोबार बड़े पैमाने पर विश्वविद्यालय के छात्रों पर टिका है, लेकिन इन इमारतों की सुरक्षा जांच किसकी जिम्मेदारी है, यह अक्सर स्पष्ट नहीं होता।
दिल्ली में PG का ढांचा और उसकी खामियां
दिल्ली विश्वविद्यालय के दोनों कैंपस के आसपास हजारों छात्र पीजी में रहते हैं। हॉस्टल की सीटें सीमित होने के कारण बाहर से आने वाले अधिकांश छात्रों के पास निजी पीजी के अलावा विकल्प नहीं होता। इनमें से बड़ी संख्या रिहायशी इमारतों में चलती है, जिन्हें बाद में कमरों में बांट दिया जाता है।
इस ढांचे में तीन कमजोर कड़ियां लगातार सामने आती रही हैं — पुरानी इमारतों की संरचनात्मक जांच का न होना, बिना मंजूरी के अतिरिक्त मंजिलें बनाना, और आग व आपात निकासी के इंतजाम का अभाव। सत्य निकेतन हादसे ने इन तीनों सवालों को फिर सामने ला दिया है।
छात्र और अभिभावक क्या देखें
पीजी चुनते समय कुछ बातें जांची जा सकती हैं: इमारत की उम्र और उसमें बाद में जोड़ी गई मंजिलें, दीवारों में बड़ी दरारें, सीढ़ियों की चौड़ाई और दूसरा निकास, बिजली की वायरिंग की हालत, और क्या इमारत के पास नगर निगम की वैध मंजूरी है। किराए पर कमरा लेने से पहले लिखित समझौता लेना भी उपयोगी होता है।
आगे क्या
अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच में इमारत गिरने का तकनीकी कारण क्या निकलता है — निर्माण की खामी, अवैध निर्माण, या रखरखाव का अभाव। साथ ही यह भी कि क्या इस हादसे के बाद दिल्ली में पीजी और छात्र आवासों के लिए कोई ठोस पंजीकरण और सुरक्षा जांच व्यवस्था बनती है, या मामला सिर्फ एक एफआईआर तक सीमित रह जाता है।
