भारतीय बैडमिंटन के लिए एक और ऐतिहासिक दिन। सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी ने चीन मास्टर्स 2026 का पुरुष युगल खिताब जीत लिया है। शेनझेन में खेले गए फाइनल में उन्होंने मेजबान चीन की जोड़ी हे जी टिंग और रेन शियांग यू को हराया।
पहला गेम गंवाने के बाद वापसी
मुकाबले की शुरुआत भारतीय जोड़ी के लिए बेहद खराब रही। पहला गेम वे 11-21 से हार गए, जो एकतरफा रहा।
लेकिन इसके बाद जो हुआ वह इस जीत को खास बनाता है। सात्विक-चिराग ने दूसरा गेम 21-13 से जीतकर मुकाबले में वापसी की, और निर्णायक तीसरे गेम में 21-17 से जीत दर्ज कर खिताब अपने नाम किया।
अंतिम स्कोर रहा — 11-21, 21-13, 21-17।
2005 से अब तक कोई भारतीय नहीं जीता था
इस जीत का सबसे बड़ा महत्व यही है। चीन मास्टर्स टूर्नामेंट 2005 में शुरू हुआ था, और तब से लेकर अब तक कोई भी भारतीय खिलाड़ी यह खिताब नहीं जीत सका था। सात्विक और चिराग यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय बने।
चीन की धरती पर चीनी जोड़ी को हराना अपने आप में कठिन चुनौती होती है, क्योंकि बैडमिंटन में मेजबान दर्शकों का दबाव बड़ा कारक होता है।
सीजन का दूसरा खिताब
यह इस सत्र में इस जोड़ी का दूसरा खिताब है। इससे पहले उन्होंने मई में सिंगापुर ओपन जीता था। एक ही सत्र में दो बड़े खिताब जीतना उनकी निरंतरता का संकेत है।
अब नजर एशियाई खेलों पर
यह जीत ऐसे समय आई है जब एशियाई खेल 2026 बिल्कुल नजदीक हैं। जापान के आइची-नागोया में ये खेल 19 सितंबर से शुरू हो रहे हैं।
बैडमिंटन में एशियाई खेलों का पदक विश्व स्तर के पदक के बराबर माना जाता है, क्योंकि दुनिया की अधिकांश शीर्ष जोड़ियां एशियाई देशों से ही आती हैं — चीन, इंडोनेशिया, मलेशिया, जापान और दक्षिण कोरिया। यानी यहां का मुकाबला किसी विश्व चैंपियनशिप से कम नहीं होता।
चीन मास्टर्स में चीनी जोड़ी को उन्हीं की धरती पर हराना इस लिहाज से एक मजबूत मनोवैज्ञानिक बढ़त है।
भारतीय युगल बैडमिंटन का सफर
लंबे समय तक भारतीय बैडमिंटन की पहचान एकल वर्ग से रही — खासकर महिला और पुरुष सिंगल्स में। युगल वर्ग में भारत की उपस्थिति सीमित थी।
सात्विक-चिराग की जोड़ी ने इस धारणा को बदला है। उनकी सफलता का असर यह भी है कि अब देश में युगल वर्ग को गंभीरता से लिया जाने लगा है और अकादमियों में इसके लिए अलग से तैयारी होने लगी है।
आगे क्या
अब सीधे नजर एशियाई खेलों पर रहेगी, जहां यह जोड़ी भारत की सबसे मजबूत पदक उम्मीदों में से एक है। फिटनेस बनाए रखना और लय को बरकरार रखना अगले दो हफ्तों की मुख्य चुनौती होगी।