Hnews · हिंदी समाचार8 सितम्बर 2026
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राजनीति

रेवंत रेड्डी का BJP पर वोट हटाने का आरोप, वामदलों से साथ आने की अपील

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की आड़ में भाजपा विरोधी वोट व्यवस्थित तरीके से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस और वामदलों से एकजुट होने की अपील की है।

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तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया की आड़ में भाजपा विरोधी मतदाताओं के नाम जानबूझकर और व्यवस्थित तरीके से हटाए जा रहे हैं।

क्या है आरोप

मुख्यमंत्री के अनुसार भाजपा ने 2014, 2019 और 2024 के चुनावों में बूथवार मतदान के रुझान का विश्लेषण किया, और उसी आधार पर नाम हटाए जा रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि करीब एक करोड़ नाम निशाने पर हैं, और हटाए जाने वाले मतदाताओं में मुख्य रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक वर्ग के लोग हैं।

रेड्डी का यह भी कहना है कि इसी तरह की रणनीति पहले महाराष्ट्र, बिहार और पश्चिम बंगाल में अपनाई गई, और अब इसे तेलंगाना में दोहराने की कोशिश हो रही है।

वामदलों से अपील

मुख्यमंत्री ने इसी सिलसिले में कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टियों और अन्य दलों से एकजुट होने की अपील की। उनका तर्क है कि इस मुद्दे पर अलग-अलग लड़ने के बजाय साझा मोर्चा जरूरी है।

यह अपील राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि तेलंगाना में वामदलों का सीमित लेकिन कुछ क्षेत्रों में निर्णायक जनाधार रहा है।

2029 की ओर इशारा

रेड्डी ने कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव का नतीजा मतदाता सूची में हो रहे बदलावों के आधार पर अभी से तय हो रहा है। यानी उनके अनुसार यह एक दीर्घकालिक रणनीति है, न कि किसी एक चुनाव तक सीमित मुद्दा।

SIR क्या है

विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक प्रक्रिया है, जिसमें मौजूदा प्रविष्टियों का सत्यापन किया जाता है। इसका घोषित उद्देश्य होता है — दोहरी प्रविष्टियां हटाना, स्थान बदल चुके या मृत मतदाताओं के नाम हटाना, और नए पात्र मतदाताओं को जोड़ना।

प्रक्रिया के तहत नाम हटाने से पहले नोटिस देने और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर देने का प्रावधान होता है। विवाद आमतौर पर इसी क्रियान्वयन के स्तर पर उठते हैं — कि नोटिस वास्तव में पहुंचा या नहीं, और आपत्ति दर्ज कराने का पर्याप्त समय मिला या नहीं।

मतदाता क्या कर सकते हैं

राजनीतिक बहस से अलग, हर मतदाता के लिए एक व्यावहारिक कदम उपलब्ध है — अपनी प्रविष्टि की स्थिति खुद जांचना। निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर मतदाता अपना नाम खोज सकते हैं।

अगर नाम सूची में न मिले, तो निर्धारित फॉर्म भरकर उसे दोबारा जोड़ने के लिए आवेदन किया जा सकता है। यह प्रक्रिया चुनाव की घोषणा से पहले पूरी कर लेना बेहतर होता है, क्योंकि उसके बाद समयसीमा सीमित हो जाती है।

आगे क्या

यह मुद्दा कई राज्यों में राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है और इस पर निर्वाचन आयोग की प्रतिक्रिया तथा अदालती कार्यवाही, दोनों पर नजर रहेगी। विपक्षी दलों की साझा रणनीति बनती है या नहीं, यह भी आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा।

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