सितंबर का महीना मॉनसून के लिहाज से हमेशा संक्रमण का दौर होता है — कहीं बारिश जारी रहती है तो कहीं वापसी शुरू हो जाती है। इस साल भी तस्वीर मिली-जुली है।
अभी क्या स्थिति है
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की 8 सितंबर की जानकारी के अनुसार अगले तीन-चार दिनों के दौरान पूर्वी भारत में कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है।
वहीं प्रायद्वीपीय भारत में अगले एक हफ्ते तक बारिश की गतिविधि कमजोर बनी रहने का अनुमान है।
वापसी कब से शुरू होगी
मॉनसून की वापसी की शुरुआत आमतौर पर पश्चिमी राजस्थान से होती है, और इस बार भी यही अनुमान है — सितंबर के मध्य के आसपास।
हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण बात समझनी जरूरी है। आईएमडी के मानदंडों के अनुसार दक्षिणी प्रायद्वीप से और इस तरह पूरे देश से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी 1 अक्टूबर के बाद ही मानी जाती है, जब हवाओं का पैटर्न दक्षिण-पश्चिमी दिशा से बदलता है।
यानी वापसी एक दिन की घटना नहीं, बल्कि उत्तर-पश्चिम से दक्षिण की ओर बढ़ने वाली एक क्रमिक प्रक्रिया है, जिसमें कई हफ्ते लगते हैं।
इस साल का पूरा मौसम कैसा रहा
आईएमडी ने 29 मई 2026 को अपने पूर्वानुमान में संशोधन करते हुए दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की मौसमी बारिश को दीर्घावधि औसत (LPA) का 90 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था।
क्षेत्रवार अनुमान इस प्रकार था:
• पूर्वोत्तर भारत: सामान्य (LPA का 94-106 प्रतिशत)
• मध्य और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत: सामान्य से कम (94 प्रतिशत से कम)
• उत्तर-पश्चिम भारत: सामान्य से कम (92 प्रतिशत से कम)
विभाग के आकलन के अनुसार 2026 में मौसम के कमजोर रहने की संभावना 60 प्रतिशत और सामान्य से कम रहने की 24 प्रतिशत आंकी गई थी — यानी कुल मिलाकर 84 प्रतिशत संभावना बारिश के सामान्य से कम या कमजोर रहने की।
इसका असर किस पर पड़ता है
सितंबर की बारिश खेती के लिहाज से निर्णायक होती है। इस समय खरीफ फसल पकने की अवस्था में होती है, और उसी दौरान रबी की बुवाई के लिए मिट्टी में नमी जमा होती है।
बहुत जल्दी वापसी होने पर रबी की बुवाई प्रभावित हो सकती है, क्योंकि मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं बचती। दूसरी ओर, जरूरत से ज्यादा बारिश कटाई के लिए तैयार खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा सकती है।
जलाशयों का स्तर भी इसी दौरान तय होता है, जिसका असर आने वाले महीनों में सिंचाई और पेयजल आपूर्ति पर पड़ता है।
आम लोगों के लिए क्या मतलब
पूर्वी भारत में अगले कुछ दिन भारी बारिश की आशंका को देखते हुए स्थानीय मौसम चेतावनियों पर ध्यान देना उपयोगी रहेगा। निचले इलाकों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की संभावना बनी रहती है।
वहीं प्रायद्वीपीय भारत में कमजोर बारिश का अर्थ है उमस भरा मौसम और तापमान में बढ़ोतरी।
आगे क्या देखें
अगले दो हफ्तों में सबसे अहम यह होगा कि वापसी की प्रक्रिया समय पर शुरू होती है या नहीं, और सितंबर के आखिरी दिनों में कोई सक्रिय मौसमी प्रणाली बनती है या नहीं। आईएमडी हर कुछ दिन में अपडेट जारी करता रहता है, और खेती से जुड़े फैसलों के लिए यही सबसे भरोसेमंद स्रोत है।