सितंबर की शुरुआत में रसोई और वाहन ईंधन दोनों महंगे हुए हैं। सीएनजी, पीएनजी और व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर — तीनों के दाम बढ़े हैं, जिसका सीधा असर घरेलू बजट और परिवहन लागत पर पड़ेगा।
दिल्ली में नए दाम
CNG: दिल्ली में सीएनजी 3.89 रुपये प्रति किलो महंगी होकर 83.09 रुपये से बढ़कर 86.98 रुपये प्रति किलो हो गई है।
व्यावसायिक एलपीजी: 19 किलो के व्यावसायिक सिलेंडर के दाम 9.50 से 11.50 रुपये तक बढ़े हैं, जिसके बाद दिल्ली में यह 2,747.50 रुपये पर पहुंच गया।
मुंबई में नए दाम
CNG: महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने 1 सितंबर से मुंबई में सीएनजी के दाम 2 रुपये प्रति किलो बढ़ाकर 88 रुपये प्रति किलो कर दिए।
घरेलू PNG: पाइप्ड नेचुरल गैस 1 रुपये प्रति एससीएम बढ़कर 53 रुपये प्रति एससीएम हो गई है।
दाम क्यों बढ़े
कंपनियों के अनुसार इसकी मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) कीमतों में तेज बढ़ोतरी है। पश्चिम एशिया में नए सिरे से उपजे संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य से गैस कार्गो की आवाजाही में आई बाधा ने आपूर्ति को प्रभावित किया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा व्यापार का सबसे संवेदनशील मार्ग माना जाता है। दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी संकरे रास्ते से गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा का असर तुरंत अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर दिखता है।
साल भर में कितनी बढ़ोतरी
दिल्ली में सीएनजी की कीमतों में इस साल करीब 10 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हो चुकी है। जनवरी में यह 77.09 रुपये प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर 86.98 रुपये पर पहुंच गई है।
किस पर कितना असर
सीएनजी वाहन मालिक: सीएनजी का सबसे बड़ा आकर्षण चलाने की कम लागत रहा है। लगातार बढ़ते दाम पेट्रोल की तुलना में इसकी बचत को कम करते हैं। हालांकि प्रति किलोमीटर लागत के हिसाब से सीएनजी अब भी पेट्रोल से सस्ती पड़ती है।
टैक्सी और ऑटो चालक: इस वर्ग पर असर सबसे सीधा पड़ता है, क्योंकि ईंधन उनकी दैनिक लागत का सबसे बड़ा हिस्सा होता है।
व्यावसायिक एलपीजी: इसका इस्तेमाल होटल, रेस्तरां और ढाबों में होता है। यहां बढ़ोतरी का असर अंततः खाने की कीमतों पर पड़ सकता है।
पीएनजी उपभोक्ता: घरेलू रसोई में पाइप से आने वाली गैस के दाम बढ़ने का असर सीधे मासिक बिल पर दिखेगा।
बचत के व्यावहारिक तरीके
सीएनजी वाहनों में टायर का सही दबाव, समय पर सर्विसिंग और एकसमान गति से चलना — ये तीनों माइलेज पर वास्तविक असर डालते हैं। रसोई में पीएनजी के मामले में बर्तन को ढककर पकाना और सही आकार के बर्तन का इस्तेमाल खपत घटाता है।
आगे क्या
अब सबसे अहम यह है कि पश्चिम एशिया की स्थिति में सुधार होता है या नहीं। अगर अंतरराष्ट्रीय एलएनजी कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले महीनों में और बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता। दाम आमतौर पर महीने की शुरुआत में संशोधित होते हैं।