दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल में ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन ने ऐसी पारी खेली जिसने रिकॉर्ड बुक के कई पन्ने पलट दिए। चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में साउथ जोन के खिलाफ उन्होंने 334 गेंदों पर 270 रन बनाए, जिसकी बदौलत ईस्ट जोन ने 708 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया।
30 चौके, 7 छक्के और बीच में रिटायर्ड हर्ट
किशन की पारी में 30 चौके और 7 छक्के शामिल रहे। पारी के बीच एक दिलचस्प मोड़ भी आया — वे 250 रन पर रिटायर्ड हर्ट होकर पवेलियन लौट गए थे, लेकिन बाद में दोबारा बल्लेबाजी करने उतरे और 20 रन और जोड़े। आखिरकार 270 के स्कोर पर उनकी पारी का अंत हुआ।
कौन-कौन से रिकॉर्ड बने
यह पारी दलीप ट्रॉफी के फाइनल में बना दूसरा सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर है। इस सूची में पहले स्थान पर अब भी रमन लांबा हैं, जिन्होंने 1987 के फाइनल में 471 गेंदों पर 320 रन बनाए थे।
दूसरा उल्लेखनीय रिकॉर्ड यह रहा कि ईशान किशन दलीप ट्रॉफी फाइनल में दोहरा शतक लगाने वाले पहले कप्तान-विकेटकीपर बन गए। वे ईस्ट जोन के कप्तान होने के साथ टीम के नियमित विकेटकीपर भी हैं — यानी विकेट के पीछे लंबी पारी के बाद बल्ले से यह प्रदर्शन।
टीम इंडिया में वापसी का सवाल
ईशान किशन के लिए यह पारी सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है। पिछले कुछ समय से वे राष्ट्रीय टीम से बाहर रहे हैं, और घरेलू क्रिकेट में लगातार खेलने को लेकर चर्चा होती रही है। ऐसे में फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में 334 गेंदों की लंबी पारी एक स्पष्ट संदेश है — तकनीक और धैर्य, दोनों मोर्चों पर।
लाल गेंद की क्रिकेट में चयनकर्ता आमतौर पर लंबी पारियां खेलने की क्षमता देखते हैं। इस लिहाज से 334 गेंद खेलना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना 270 रन बनाना, क्योंकि यह एकाग्रता की परीक्षा होती है।
ईस्ट जोन की स्थिति मजबूत
किशन की पारी के दम पर ईस्ट जोन ने 708 रन बनाए और साउथ जोन को मुश्किल स्थिति में डाल दिया। इतने बड़े स्कोर के बाद मैच का नियंत्रण पूरी तरह ईस्ट जोन के पास आ गया है।
आगे क्या
अब देखना यह है कि साउथ जोन इस विशाल स्कोर का जवाब कैसे देती है और क्या ईस्ट जोन खिताब तक पहुंच पाती है। ईशान किशन के लिए अगला पड़ाव आगामी घरेलू सत्र और चयन समिति की नजर होगी। एक पारी चयन की गारंटी नहीं होती, लेकिन फाइनल में खेली गई ऐसी पारी को नजरअंदाज करना भी आसान नहीं होता।
