Hnews · हिंदी समाचार8 सितम्बर 2026
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भारत में हर 5 में से 1 खाद्य नमूना जांच में फेल, समझें पूरी तस्वीर

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2025-26 में जांचे गए 2.23 लाख से अधिक खाद्य नमूनों में से 40,023 मानकों पर खरे नहीं उतरे — यानी लगभग हर पांचवां नमूना। साथ ही निरीक्षणों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है।

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देश में खाद्य सुरक्षा की तस्वीर बताने वाले नए सरकारी आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में जांचे गए खाद्य नमूनों में से लगभग हर पांचवां नमूना सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतरा। ये आंकड़े स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने लोकसभा में लिखित उत्तर के जरिए साझा किए।

क्या कहते हैं आंकड़े

2025-26 में कुल 2,23,808 खाद्य नमूनों का विश्लेषण किया गया, जिनमें से 40,023 नमूने ‘नॉन-कन्फॉर्मिंग’ यानी मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। यह लगभग 18 प्रतिशत बैठता है — यानी हर पांच में से करीब एक नमूना।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि 2025-26 के आंकड़े अभी अनंतिम (provisional) हैं।

निरीक्षण भी तेजी से बढ़े

आंकड़ों का दूसरा पहलू सकारात्मक है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) तथा राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा विभागों ने 2025-26 में कुल 5,20,566 निरीक्षण किए।

तुलना करें तो यह संख्या लगातार बढ़ रही है:

• 2023-24: 3,57,072 निरीक्षण
• 2024-25: 4,01,391 निरीक्षण
• 2025-26: 5,20,566 निरीक्षण

यानी दो साल में निरीक्षणों की संख्या में करीब 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसका एक अर्थ यह भी है कि ज्यादा नमूने फेल होने का कारण आंशिक रूप से ज्यादा जांच होना भी है।

‘नॉन-कन्फॉर्मिंग’ का मतलब क्या है

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। हर फेल नमूना खतरनाक नहीं होता। जांच में नमूने तीन श्रेणियों में आ सकते हैं:

असुरक्षित (unsafe): जिसमें स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तत्व मिले हों। यह सबसे गंभीर श्रेणी है।

घटिया (substandard): जो तय गुणवत्ता मानकों से नीचे हो, लेकिन जरूरी नहीं कि तुरंत खतरनाक हो।

लेबल संबंधी खामी: जहां उत्पाद तो ठीक हो, पर पैकेट पर दी गई जानकारी नियमों के अनुरूप न हो।

तीनों को मिलाकर ‘नॉन-कन्फॉर्मिंग’ कहा जाता है, इसलिए 40,023 का पूरा आंकड़ा जहरीले भोजन का संकेत नहीं है।

कार्रवाई का हिसाब

आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में 31,878 दीवानी मामलों में जुर्माना लगाया गया और 1,918 आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि हुई।

लाइसेंस पर कार्रवाई की तस्वीर भी सामने आई है — पिछले पांच वर्षों में 4,461 खाद्य कारोबारी लाइसेंस निलंबित किए गए और 11,493 रद्द किए गए। यानी करीब 16,000 खाद्य कारोबारियों पर लाइसेंस संबंधी कार्रवाई हुई।

राज्यवार स्थिति

राज्यवार आंकड़ों में 2025-26 के दौरान सबसे अधिक नॉन-कन्फॉर्मिंग नमूने उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए। हालांकि यहां भी यह ध्यान रखना होगा कि बड़े राज्यों में आबादी और खाद्य कारोबार दोनों अधिक होते हैं, इसलिए निरपेक्ष संख्या की तुलना पूरी तस्वीर नहीं देती।

उपभोक्ता क्या कर सकते हैं

खरीदारी के समय पैकेट पर FSSAI लाइसेंस नंबर देखना सबसे बुनियादी कदम है। इसके अलावा निर्माण और उपयोग की अंतिम तिथि, पैकेजिंग की स्थिति और भंडारण का तापमान — ये तीनों बातें ध्यान देने लायक हैं।

किसी उत्पाद को लेकर शिकायत होने पर उपभोक्ता FSSAI की शिकायत व्यवस्था या राज्य के खाद्य सुरक्षा विभाग से संपर्क कर सकते हैं। शिकायत के साथ खरीद का बिल और बैच नंबर होना जांच में मदद करता है।

आगे क्या

असली सवाल यह है कि निरीक्षण बढ़ने के साथ-साथ मामलों के निपटारे और सजा की दर कितनी बढ़ती है। 2.23 लाख नमूनों की जांच के मुकाबले 1,918 आपराधिक दोषसिद्धि का आंकड़ा बताता है कि प्रवर्तन और न्यायिक प्रक्रिया के बीच की दूरी अभी बड़ी है।

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