10 सितंबर को पिठोरी अमावस्या के अवसर पर परिवार कल्याण, संतान सुख और पितृ स्मरण से जुड़ी धार्मिक परंपराएं निभाई जा रही हैं।
भाद्रपद अमावस्या को कई क्षेत्रों में पिठोरी अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। परंपरा में महिलाएं परिवार और बच्चों के कल्याण की कामना करती हैं, 64 योगिनियों का पूजन करती हैं और श्रद्धालु पितरों के लिए तर्पण व दान करते हैं।
पूजा की सामान्य परंपरा
स्नान के बाद संकल्प, दीप, नैवेद्य, कथा-पाठ और जरूरतमंदों को भोजन या दान सामान्य धार्मिक विधियों में शामिल हैं। रीति क्षेत्र, परिवार और संप्रदाय के अनुसार अलग हो सकती है; स्थानीय पुरोहित या परिवार की परंपरा को प्राथमिकता दें।
आस्था और सावधानी
पितृदोष दूर होने जैसे दावे धार्मिक विश्वास का विषय हैं, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित चिकित्सा तथ्य नहीं। व्रत रखने वाले बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं या स्वास्थ्य समस्या वाले लोग भोजन और दवा में बदलाव से पहले चिकित्सकीय सलाह लें।
स्रोत: Economic Times / Jansatta
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