Thursday, April 3, 2025
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नवरात्रि के पांचवें और छठे दिन किस देवी की होगी पूजा?

इस बार चैत्र नवरात्र में पंचमी तिथि का क्षय हो रहा है। ऐसे में कल ही पंचमी तिथि और षष्ठी तिथि दोनों का पूजन एक साथ ही होगा। पंचमी तिथि को मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। षष्ठी तिथि को मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। आइए जानते हैं । पंचमी और षष्ठी दोनों तिथियों की पूजन विधि

चैत्र नवरात्र के पंचमी तिथि को होता है किस देवी का पूजन?

चैत्र नवरात्र के पंचमी तिथि को पूजन विधि

चैत्र नवरात्रि के पंचमी तिथि को मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। मां स्कंदमाता की पूजा भक्तो में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। मां भक्तो के सभी संकट हरके विघ्न बाधाओं को दूर करती है। भक्तों की मनोकामना पूर्ण करती है जो भक्त मोक्ष प्राप्त करने की इच्छा से मां कात्यायनी की पूजा करते हैं मां स्कंदमाता उनको मोक्ष प्रदान करती हैं।

कैसे करें मां स्कंदमाता की पूजा

सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण कर मां स्कंदमाता की पूजा प्रारम्भ करें। आचमन कर मां को गंगाजल से स्नान कराएं। मां को रोली, चंदन का टीका करें। उसके बाद मां को चुनरी व वस्त्र अर्पित करें। तदुपरांत मां को मिठाई व फल का भोग अर्पण करें।अंत में मां का हवन करें। मां का नाम जप करें। आरती करें।

मां स्कंदमाता का प्रिय भोग

मां स्कंदमाता को केले का भोग अर्पण किया जाता है। मां को खीर का भोग अति प्रिय है।

मां स्कंदमाता को समा के चावल, साबूदाना की खीर, मखाने की खीर का भोग अर्पण करें।

स्कंदमाता मां की पूजा का मंत्र

मां स्कंदमाता की पूजा अर्चना करते समय मां स्कंदमाता के मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः का जप करना चाहिए।

मां कात्यायनी की पूजा क्यों की जाती है?

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। मां कात्यायनी की पूजा प्रेम संबंध में सफलता के लिए की जाती है। वैवाहिक संबंधों में सफलता के लिए भी मां कात्यायनी की पूजा की जाती है।

मां कात्यायनी की पूजा कैसे करें

मां कात्यायनी की पूजा गोधूली बेला में की जाती है। मां कात्यायनी की पूजा लाल रंग के कपड़े पहन कर की जाती है। मां को पीले फूल, पीली मिठाई अतिप्रिय है। मां को पीले रंग के गैंदे के पुष्प और अन्य पीले रंग के सुगंधित पुष्प अति प्रिय हैं। जिन भक्तों के विवाह में विलम्ब हो रहा हो उन्हें मां कात्यायनी की पूजा में पीले सुगंधित पुष्प अर्पित करना चाहिए। जिन भक्तों के प्रेम संबंधों में बाधायें आ रही हैं उन्हें भी मां को पीले खुशबू वाले फूल अर्पित करने चाहिए। मां की पूजा करते समय मां के मंत्र का जप करके हवन सामग्री अर्पण करें।

मां कात्यायनी का भोग

मां कात्यायनी को पीले रंग के फल व मिठाई का भोग लगाएं। मां को शहद का भोग भी अति प्रिय है। शहद का भोग लगाकर प्रसाद रूप में बांटने से भी मां अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं।

मां कात्यायनी की पूजा की कथा

कत नामक एक महर्षि थे। जिनके पुत्र का नाम कात्य था। उनके नाम पर उस गोत्र का नाम कात्य गोत्र रखा गया। कात्य गोत्र में एक ऋषि हुए कात्यायन ऋषि जिनकी कोई संतान नहीं थी। इसलिए कात्यायन ऋषि ने मां पराम्बा की आराधना की थी। जिससे पराम्बा ने कात्यायन ऋषि की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें स्वयं पुत्री रूप में अवतार लेने का आशीर्वाद दिया। मां ने कात्यायनी मां के रूप में कात्यायन ऋषि के घर जन्म लिया।

उसी समय महिषासुर नामक दानव का अत्याचार जब पृथ्वी पर बढ़ने लगा तब मां कात्यायनी ने महिषासुर का संहार किया।

मां कात्यायनी की पूजा कौन करें?

मां कात्यायनी की पूजा प्रेम संबंधों में सफलता प्राप्त करने के लिए, विवाह संबंधों में मधुरता के लिए करें। मां कात्यायनी की पूजा शोध कार्य करने वाले विद्यार्थियों के लिए भी सर्वोत्तम हैं। भगवान कृष्ण को वरण करने के लिए भी गोपियों ने मां कात्यायनी की पूजा की थी।

 

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