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Meta के पीछे Mark Zuckerberg का कैसा हैं ये है प्लान, जानें यहाँ

सोशल मीडिया की दुनिया में फेसबुक ने एक बड़ा धमाका किया है। बीते कई दिनों से चल रहे कयासों पर विराम लगाते हुए फेसबुक ने अपनी कंपनी का नाम बदलने का ऐलान कर दिया। कंपनी का नाम मेटा होगा।

जकरबर्ग ने कहा कि भविष्य में फेसबुक सिर्फ एक सोशल मीडिया कंपनी नहीं रहेगी। बल्कि यह मेटावर्स कंपनी बनेगी। इसके अलावा कंपनी एम्बॉइडेट इंटरनेट पर काम करेगी। इससे असली और वर्चुअल दुनिया का जुड़ाव और भी गहरा हो जाएगा। फेसबुक के सभी 3 अरब यूजर्स पर इसका असर पड़ेगा। यही नहीं कंपनी दस हजार लोगों की नियुक्ति भी करने वाली है। सीधे तौर पर कहें तो मेटावर्स की दुनिया में आगे बढ़ने के लिए फेसबुक ने अपना नाम मेटा कर लिया है। अगर आप भी फेसबुक यूजर हैं तो जान लीजिए कि क्या बदलाव होने वाले हैं।

समझिए क्या है मेटावर्स

मेटावर्स को समझने वाले और क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में सीनियर लेक्चरर निक केली कहते हैं कि इंसान ने ऑडियो स्पीकर से लेकर टेलीविजन तक कई चीजें विकसित की है। इन सारे आविष्कारों को हम अपनी इन्द्रियों से महसूस कर सकते हैं। भविष्य में इंसान छूने और गंध जैसी इंद्रियों के लिए उपकरण विकसित करेगा। इन्हीं प्रौद्योगिकियों को व्यक्त करने के लिए मेटावर्स नामक यह शब्द गढ़ा गया है। यह वर्चुअल दुनिया और भौतिक दुनिया के मेल को बताता है।

ये कंपनियां भी कर रही निवेश

मेटावर्स पर फेसबुक ही नहीं बल्कि माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियां भी निवेश कर रही हैं। जकरबर्ग काफी पहले से वर्चुअल रियलिटी और ऑगमेंटेड रियलिटी पर भारी निवेश करते आए हैं।

मेटावर्स शब्द का इतिहास

1992 में साइंस फिक्शन लेखक नील स्टीफेंसन ने अपने उपन्यास स्नो केश में सबसे पहले मेटावर्स शब्द का इस्तेमाल किया था। याद रहे आधुनिक विज्ञान के कई शब्द उपन्यासों से ही आते हैं जासे रोबोट 1920 के कैरेल कापेक नाटक से आया है तो विलियम गिब्सन की एक किताब से साइबर स्पेस शब्द आया है।

विशेषज्ञों के मुताबिक शब्द “मेटावर्स” उपसर्ग “मेटा” और “वर्स” से बना है। इसका अर्थ होता है ब्रह्मांड से परे। इस शब्द का उपयोग आमतौर पर इंटरनेट के भविष्य के पुनरावृत्ति की अवधारणा का वर्णन करने के लिए किया जाता है। यह कथित आभासी ब्रह्मांड 3D से जुड़ा हुआ है।

एक आभासी दुनिया

यह साझा आभासी दुनिया को संदर्भित करता है जहां भूमि, भवन, अवतार और यहां तक कि नाम भी खरीदे और बेचे जा सकते हैं, अक्सर क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग करते हुए। इन वातावरणों में, लोग दोस्तों के साथ घूम सकते हैं, इमारतों पर जा सकते हैं, सामान और सेवाएं खरीद सकते हैं और कार्यक्रमों में भाग ले सकते हैं।

कोरोना महामारी के दौरान मेटावर्स अवधारणा की लोकप्रियता में वृद्धि हुई है क्योंकि लॉकडाउन में वर्क फ्रॉम होम के दौरान लोगों ने व्यवसाय और मनोरंजन दोनों के लिए ऑनलाइन टूल का सहारा लिया है। वहीं मेटावर्स कार्यस्थल के टूल से लेकर गेम और सामुदायिक प्लेटफ़ॉर्म तक कई तरह की आभासी वास्तविकताओं को शामिल करता है।

फेसबुक में इन्होंने दिया था सुझाव

फेसबुक के फॉर्मर सिविक इंटीग्रिटी चीफ समिध चक्रवर्ती की तरफ से इस नए नाम का सुझाव दिया गया था। अब क्योंकि मार्क जुकरबर्ग पहले से ही वर्चुअल रियलिटी और ऑगमेंटेड रियलिटी में भारी निवेश कर रहे थे, ऐसे में उनके लिए अपनी कंपनी का नाम बदल मेटा करना कोई बड़ी बात नहीं थी।

क्या कहा फेसबुक ने

फेसबुक ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से सिलसिलेवार ट्वीट कर इस बारे में कहा, ‘जिन एप्स- इंस्टाग्राम, मैसेंजर और वाट्सएप- को हमने बनाया है, उनके नाम वहीं रहेंगे।’ विभिन्न एप और तकनीकों को इस नए ब्रांड के तहत लाया जाएगा। हालांकि कंपनी अपना कारपोरेट ढांचा नहीं बदलेगी। कंपनी के आग्मेंटेड रियल्टी कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि नया नाम मेटावर्स के निर्माण पर अपना ध्यान केंद्रित करेगा।

मेटावर्स का भविष्य

यह स्पष्ट नहीं है कि वास्तविक जीवन की पूरी तरह से नकल करने वाला एक सच्चा मेटावर्स किस हद तक संभव है या इसे विकसित होने में कितना समय लगेगा। पर ब्लॉकचैन-आधारित मेटावर्स में कई प्लेटफ़ॉर्म अभी भी संवर्धित वास्तविकता (एआर) और आभासी वास्तविकता (वीआर) तकनीक विकसित कर रहे हैं जो उपयोगकर्ताओं को स्पेस में इंट्रैक्ट होने का मौका देगा।

Anoj Kumar
Anoj Kumar a Indian Journalist & Founder Of Hnews

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