Friday, April 4, 2025
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लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पारित: नए कानून से उठे विवाद और विरोध

भारत की संसद में देर रात लोकसभा ने वक्फ संशोधन विधेयक को पारित कर दिया, जिससे यह कानून बनने के एक कदम और करीब पहुंच गया है। केंद्र सरकार का दावा है कि इस विधेयक से वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी, समावेशी और प्रभावी होगी। वहीं, विपक्ष का आरोप है कि यह विधेयक अल्पसंख्यकों पर हमला है और सरकार की नजर 9.4 लाख एकड़ वक्फ भूमि पर है। इस रिपोर्ट में हम नए कानून के बदलावों और उसके विरोध को विस्तार से समझेंगे।

वक्फ क्या है?

‘वक्फ’ शब्द अरबी भाषा के ‘वकूफा’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है ‘रोकना’ या ‘समर्पित करना’। वक्फ ऐसी संपत्तियों को संदर्भित करता है जो विशेष रूप से मुस्लिम धार्मिक और परोपकारी उद्देश्यों के लिए समर्पित की जाती हैं। इस संपत्ति को बेचना या अन्य किसी उपयोग में लाना प्रतिबंधित होता है। इसका स्वामित्व ‘अल्लाह’ को सौंपा जाता है, जिसका अर्थ है कि इसे दान करने वाला व्यक्ति इसे वापस नहीं ले सकता।

भारत में वक्फ की परंपरा 12वीं शताब्दी में दिल्ली सल्तनत के दौरान शुरू हुई थी। मोहम्मद गौरी ने मुल्तान की जामा मस्जिद के लिए दो गांवों को वक्फ संपत्ति के रूप में समर्पित किया था। समय के साथ वक्फ संपत्तियों की संख्या बढ़ती गई। 19वीं शताब्दी के अंत में ब्रिटिश शासन के दौरान एक वक्फ विवाद लंदन के प्रिवी काउंसिल तक पहुंचा, जहां इसे ‘हानिकारक’ बताते हुए अमान्य घोषित कर दिया गया। हालांकि, भारत में 1913 में एक नया कानून पारित कर वक्फ को वैध बना दिया गया।

भारत में वक्फ संपत्तियां कितनी हैं?

वक्फ बोर्ड भारत में सशस्त्र बलों और रेलवे के बाद तीसरा सबसे बड़ा भूमि स्वामी है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के अनुसार, देशभर में 8.7 लाख वक्फ संपत्तियां हैं, जो लगभग 9.4 लाख एकड़ भूमि में फैली हुई हैं। इन संपत्तियों की अनुमानित कीमत 1.2 लाख करोड़ रुपये है। उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक वक्फ संपत्तियां दर्ज हैं, जहां 1.2 लाख से अधिक अचल संपत्तियां वक्फ बोर्ड के अधीन हैं।

सरकार का कहना है कि कई वक्फ संपत्तियां अवैध कब्जे और विवादों से घिरी हुई हैं। वर्तमान में 40,951 से अधिक वक्फ विवाद न्यायाधिकरणों में लंबित हैं, जिनमें से लगभग 10,000 मामले स्वयं मुसलमानों द्वारा वक्फ संस्थानों के खिलाफ दर्ज किए गए हैं।

वक्फ और ऐतिहासिक स्मारक

दिल्ली की जामा मस्जिद, फतेहपुर सीकरी स्थित सलीम चिश्ती की दरगाह और लखनऊ का बड़ा इमामबाड़ा वक्फ संपत्तियों के उदाहरण हैं। हालांकि, यह अक्सर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और वक्फ बोर्ड के बीच विवाद का कारण बनते हैं।

2018 में, उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने ताजमहल को वक्फ संपत्ति घोषित करने का दावा किया था, जिसे ASI ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ बोर्ड से इसके समर्थन में दस्तावेजी प्रमाण मांगे, जो वह प्रस्तुत करने में असमर्थ रहा। दिल्ली में सफदरजंग का मकबरा, पुराना किला, नीला गुंबद, हुमायूं के मकबरे के अंदर इसा खान की मस्जिद जैसी कई संरक्षित स्मारकों पर भी वक्फ बोर्ड ने दावा किया है।

वक्फ से जुड़े विवाद

2022 में, तमिलनाडु के तिरुचेंथुरई गांव के निवासियों को तब झटका लगा जब तमिलनाडु वक्फ बोर्ड ने पूरे गांव को अपनी संपत्ति घोषित कर दिया। मामला तब सामने आया जब एक किसान, राजगोपाल, ने अपनी 1.2 एकड़ जमीन बेचने की कोशिश की और उसे वक्फ बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेने के लिए कहा गया।

इसी तरह, गुजरात के सूरत में एक हाउसिंग सोसाइटी के निवासी ने अपनी जमीन को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया और वहां नमाज पढ़ी जाने लगी। इससे यह विवाद खड़ा हो गया कि किसी भी अपार्टमेंट या जमीन को उसके मालिक द्वारा वक्फ संपत्ति घोषित किए जाने पर वह धार्मिक स्थल बन सकता है।

वक्फ संशोधन विधेयक के प्रमुख बदलाव

  1. वक्फ घोषित करने के लिए योग्यता: केवल वह व्यक्ति जो कम से कम पांच वर्षों से इस्लाम का पालन कर रहा हो, वक्फ संपत्ति घोषित कर सकता है।
  2. स्वामित्व अनिवार्यता: वक्फ घोषित करने वाले व्यक्ति के पास संपत्ति का वैध स्वामित्व होना चाहिए।
  3. ‘वक्फ बाय यूजर’ की समाप्ति: किसी संपत्ति को वक्फ घोषित करने के लिए अब केवल लंबे समय तक धार्मिक उपयोग का आधार पर्याप्त नहीं होगा।
  4. उत्तराधिकार अधिकारों की सुरक्षा: वक्फ घोषणा से दानकर्ता के उत्तराधिकारियों, विशेषकर महिलाओं, के अधिकार प्रभावित नहीं होंगे।
  5. सरकारी संपत्ति पर प्रतिबंध: कोई भी सरकारी भूमि वक्फ संपत्ति नहीं मानी जाएगी।
  6. वक्फ बोर्ड की शक्तियों में कटौती: वक्फ बोर्ड अब स्वयं यह तय नहीं कर सकता कि कोई संपत्ति वक्फ है या नहीं।
  7. केंद्रीय वक्फ परिषद में बदलाव: परिषद के सभी सदस्य अब मुस्लिम नहीं होंगे, दो सदस्य गैर-मुस्लिम होंगे, और दो महिला सदस्य अनिवार्य होंगी।
  8. वक्फ ट्रिब्यूनल के निर्णयों को अदालत में चुनौती: अब वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले हाई कोर्ट में 90 दिनों के भीतर चुनौती दिए जा सकते हैं।

विरोध और विवाद

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने इस विधेयक का विरोध करते हुए इसे ‘भेदभावपूर्ण’ और ‘अन्यायपूर्ण’ बताया है। AIMPLB के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने आरोप लगाया कि यह सरकार वक्फ संपत्तियों को जब्त करने के लिए इस कानून का उपयोग करेगी।

संसद में विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस और समाजवादी पार्टी, ने इस विधेयक का विरोध किया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे सरकार की विफलताओं को छिपाने का एक प्रयास बताया। AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इसे ‘असंवैधानिक’ बताते हुए लोकसभा में विधेयक की प्रति फाड़ दी।

हालांकि, मुस्लिम समाज के कुछ वर्गों ने इस विधेयक का स्वागत भी किया है। उनका मानना है कि यह वक्फ संपत्तियों की लूट को रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने में मदद करेगा।

निष्कर्ष

वक्फ संशोधन विधेयक भारत में धार्मिक संपत्तियों से जुड़े कानूनों में एक बड़ा बदलाव लाने वाला कदम है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विधेयक कानून बनने के बाद किस तरह लागू किया जाता है और इसका अल्पसंख्यकों, सरकार और समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है।

ABHISHEK KUMAR ABHAY
ABHISHEK KUMAR ABHAY
I’m Abhishek Kumar Abhay, a dedicated writer specializing in entertainment, national news, and global issues, with a keen focus on international relations and economic trends. Through my in-depth articles, I provide readers with sharp insights and current developments, delivering clarity and perspective on today’s most pressing topics.
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