मां कालरात्रि की पूजा विधि शुभ मुहूर्त भोग शुभ रंग मंत्र व आरती
कल शुक्रवार को नवरात्रि का सातवां दिन है। नवरात्रि की सप्तमी तिथि को मां कालरात्रि की पूजा का विधान है। मां कालरात्रि को मां काली भी कहते हैं मां काली काले रंग के वस्त्र धारण करती हैं। कहते हैं की मां कालरात्रि बुरी नजर बुरी शक्तियों से भक्तों की रक्षा करती हैं। मां कालरात्रि की पूजा करने वाले भक्तों को अकाल मृत्यु का भय नहीं सताता है। आईए जानते हैं कैसा है मां कालरात्रि का स्वरूप, मां कालरात्रि की पूजा विधि
कैसा है मां कालरात्रि का स्वरूप?
मां कालरात्रि का शरीर श्याम वर्ण का चमकीला अंधकार की तरह है। मां कालरात्रि के श्वास बात से अग्नि प्रज्जवलित हो रही है। मां के बाल खुले हुए हैं मां कालरात्रि के चार हाथ व तीन नेत्र है एक हाथ में मैन खड़ा दूसरे हाथ में लोहे का फरसा लिए हुए है। मां का एक हाथ आशीर्वाद देती हुई मुद्रा में है। माता का चौथा हाथ अभय मुद्रा में है। मां कालरात्रि ने काला व लाल रंग का वस्त्र पहना हुआ है। मां ने चर्म वस्त्र भी पहना है।
मां कालरात्रि की पूजा विधि
सूर्योदय से पूर्व स्नान कर लें। स्वच्छ वस्त्र धारण कर पहले स्वयं को गंगाजल से शुद्ध कर फिर लोटे और फिर मां की प्रतिमा पर जल छिड़क दें। अगर आप रोज मां को स्नान करा वस्त्र परिवर्तित करते हैं तो मां को गंगाजल से स्नान कराकर लाल रंग के वस्त्र धारण करायें। मां को रोली, सिंदूर का टीका लगाए। वस्त्र अर्पित करें। फल फूल मेंवे का भोग लगाएं। मां का हवन करें। हवन में सबसे पहले मां को और हनुमान जी को लौंग के जोड़े चड़ाए फिर मां के मंत्र से हवन करें।
मां कालरात्रि का मंत्र
क्लीं ऐं श्रीं कालिकाये नमः
कालरात्रि देवी की पूजा का शुभ मुहूर्त
कल चैत्र नवरात्रि की सप्तमी तिथि रात 8:11 तक ही रहेगी इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी। अलग-अलग मुहूर्त में मां की पूजा कर सकते हैं। वैसे तो पूजा ब्रह्म मुहूर्त में की जाती है या कोशिश करें की सुबह 8:00 बजे से पहले पूजा कर ले। कल अभिजीत मुहूर्त भी बन रहा है जो की दोपहर 11:59 से 12:49 तक है इस समय भी मां की पूजा करने से मां सभी विघ्न बाधाओ और सभी बुरी शक्तियों का विनाश करती है। कल सुबह 6:08 पर सूर्योदय होगा जो की कालरात्रि पूजा के लिए एक शुभ मुहूर्तहै। मां कालरात्रि की पूजा ब्रह्म मुहूर्त में करना भी अति शुभ होता है इसलिए सुबह 4:36 से 5 बजकर 22 मिनट तक का समय भी पूजा के लिए शुभहोगा। विजय मुहूर्त में भी कालरात्रि मां की पूजा की जा सकती है यह मुहूर्त दोपहर 2:30 से 3:20 तक रहेगा। गोधूलि बेला में भी मां की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त है शाम 6: 39 से शाम 7:02 तक यह मुहूर्त रहेगा। निशिता मुहूर्त में भी मां की पूजा करना अति शुभ होता है।
दुर्गा सप्तशती की पूजा का विधान, कैसे करें दुर्गा सप्तशती का पाठ?
दुर्गा सप्तशती में कवच, अर्गला, कीलक और दुर्गा सप्तशती के 13 अध्याय होते हैं। दुर्गा सप्तशती में कवच अर्गला, कीलक का पाठ करने के बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। दुर्गा सप्तशती के बाद सिद्ध कुंजिका स्त्रोत का पाठ किया जाता है आप अपनी इच्छा के अनुसार दुर्गा सप्तशती का पाठ हिंदी या संस्कृत में कर सकते हैं। आप हिंदी में भी दुर्गा सप्तशती का पाठ कर सकते हैं और संस्कृत में भी। आप पहले कवच अर्गला कीलक पढ़ने के बाद ही दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू करें।