काँग्रेस पार्टी ने मध्य प्रदेश में किया बटवारा, इस फैसले से नाराज

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काँग्रेस पार्टी ने मध्य प्रदेश में किया बटवारा, इस फैसले से नाराज

भोपाल : डेढ़ दशक का वनवास खत्म कर मध्य प्रदेश की सत्ता में लौटी कांग्रेस की गुटबाजी चुनावी नतीजों के बाद से ही चरम पर है। और आलम यह है कि 4 दिन बाद पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के निर्देश पर शुक्रवार देर रात मंत्रियों को विभागों का बंटवारा हो सका। दरअसल, मलाईदार और रसूखवाले विभागों को लेकर खींचतान मची थी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने समन्वय के लिए प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया को जिम्मेदारी सौंपी, उसके बाद मामला सुलझ पाया।

इसी बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी चलता रहा। टीम कमलनाथ के 28 मंत्री मंगलवार को शपथ ले चुके थे, लेकिन विभागों के लिए उन्हें चार दिन इंतजार करना पड़ा। सूत्रो की मानना है कि मलाईदार और रसूखवाले विभागों पर कब्जे को लेकर वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट के बीच सहमति नहीं बन पा रही थी। विभाग बंटवारे का यह विवाद दिल्ली दरबार के सामने भी सवाल के रूप में खड़ा था। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया को सभी पक्षों के बीच समन्वय की जवाबदारी सौंपी। इसी बीच मंत्री नहीं बन पाए कई विधायकों ने बगावती मुद्रा अपनाकर दिल्ली में ही डेरा डाल दिया था।

वरिष्ठ कांग्रेसी विधायक एदल सिंह कंषाना और बिसाहू लाल सिंह सहित कुछ अन्य विधायक भी दिल्ली में सक्रिय रहे। विधायक केपी सिंह कक्काजू से फोन पर हुई चर्चा में कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया। उन्होंने इतना जरूर कहा कि दिल्ली से लौट रहा हूं। विधायक हीरालाल अलावा के बारे में खबर थी कि वह राहुल गांधी से मिलने दिल्ली पहुंचे हैं, लेकिन देर रात उन्होंने इन बातों का खंडन कर दिया। उन्होंने बताया कि मुझे मुलाकात का समय नहीं मिला। उधर, जगन्नाथपुरी की तीर्थयात्रा पर निकले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने भी शुक्रवार को इस मुद्दे पर ट्वीट के जरिये सरकार पर फिर निशाना साधा।

विभागों की खींचतान के बीच मुख्यमंत्री कमलनाथ शुक्रवार दोपहर 12 बजे से रात 10 बजे खबर लिखे जाने तक मंत्रालय में ही बैठे थे। दोपहर बाद करीब 2 घंटे तक उन्होंने किसी को मुलाकात का समय नहीं दिया। वह केवल फोन पर ही व्यस्त रहे। बताया जाता है कि विभागीय बंटवारे को लेकर सरकार की पिट रही भद को लेकर उन्होंने दिल्ली दरबार को अपनी चिंता से अवगत कराया। इसके बाद रात करीब 10 बजे विभाग के बंटवारे की सूची जारी हो पाई।

उम्मीद के मुताबिक ही मुख्यमंत्री ने उद्योग, जनसपंर्क, कौशल विकास और रोजगार सहित 8 विभाग अपने पास रखे हैं। विभागीय काम में सहयोग करने के लिए बाला बच्चन और पीसी शर्मा भी मुख्यमंत्री से संबद्ध रहेंगे। बाला बच्चन को गृह और जेल, तुलसीराम सिलावट को स्वास्थ्य, सज्जन सिंह वर्मा को लोक निर्माण, गोविंद सिंह राजपूत को राजस्व व परिवहन तथा डॉ.गोविंद सिंह को सहकारिता और संसदीय कार्य, जैसे विभाग देकर महत्व कायम रखा गया है। इतना ही नहीं तरुण भनोत को वित्त और दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्द्धन सिंह को नगरीय विकास जैसे अहम विभाग की जिम्मेदारी दी गई।

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