SIR West Bengal List 2025: 58 लाख नाम हटे, जानिए पूरा विवाद और असर

पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है। विधानसभा चुनाव से पहले जारी की गई SIR West Bengal List 2025 ने राज्य में सियासी हलचल तेज कर दी है। चुनाव आयोग द्वारा कराए गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची से 58 लाख नाम हटाए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें 24 लाख मतदाताओं को मृत, 19 लाख को स्थानांतरित, 12 लाख को लापता और 1.3 लाख को डुप्लिकेट बताया गया है।

इस घटनाक्रम ने न सिर्फ राजनीतिक दलों को आमने-सामने ला खड़ा किया है, बल्कि आम मतदाताओं के बीच भी भ्रम और चिंता की स्थिति पैदा कर दी है।

क्या है SIR West Bengal List?

SIR West Bengal List दरअसल पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची का वह ड्राफ्ट संस्करण है, जिसे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया के बाद प्रकाशित किया गया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची से:

  • मृत व्यक्तियों के नाम हटाना

  • डुप्लिकेट एंट्री समाप्त करना

  • स्थानांतरित मतदाताओं की पहचान

  • फर्जी या अवैध मतदाताओं को हटाना

चुनाव आयोग के अनुसार, इस प्रक्रिया से चुनाव की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती है।

58 लाख नाम क्यों हटाए गए? (डेटा विश्लेषण)

चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, SIR West Bengal List से हटाए गए नामों का विवरण इस प्रकार है:

श्रेणी हटाए गए नाम (लगभग)
मृत मतदाता 24 लाख
स्थानांतरित 19 लाख
लापता 12 लाख
डुप्लिकेट 1.3 लाख
कुल 58 लाख

यह संख्या अपने आप में अभूतपूर्व मानी जा रही है, क्योंकि बंगाल में आखिरी बार SIR वर्ष 2002 में कराया गया था।

ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने का मतलब

ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि नाम स्थायी रूप से हटा दिए गए हैं। जिन मतदाताओं के नाम SIR West Bengal List में शामिल नहीं हैं, उन्हें:

  • आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार

  • सुधार के लिए आवेदन करने का अवसर

  • आवश्यक दस्तावेज़ जमा करने की सुविधा

दी गई है। चुनाव आयोग के अनुसार, सभी आपत्तियों के निपटारे के बाद फाइनल वोटर लिस्ट फरवरी 2026 में जारी की जाएगी।

चुनाव आयोग का पक्ष

चुनाव आयोग का कहना है कि SIR एक नियमित और कानूनी प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना है। आयोग के अनुसार:

“इस प्रक्रिया का किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। यह पूरी तरह प्रशासनिक और निष्पक्ष कदम है।”

हालांकि, आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर किसी योग्य मतदाता का नाम गलती से हट गया है, तो उसे वापस जोड़ने की पूरी प्रक्रिया उपलब्ध है।

TMC का आरोप: ‘लोकतंत्र पर हमला’

तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने SIR West Bengal List को लेकर तीखा विरोध दर्ज कराया है।

सौगत रॉय का बयान

TMC सांसद सौगत रॉय ने इसे “घोर अन्याय” करार देते हुए कहा:

“यह भाजपा की साजिश है ताकि वैध मतदाताओं को वोट देने से रोका जा सके। हम बूथ स्तर पर सहायता केंद्र खोल रहे हैं।”

ममता बनर्जी का आक्रामक रुख

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सीधा हमला बोला। कृष्णानगर की रैली में उन्होंने कहा:

“अगर महिलाओं के नाम काटे गए, तो वे चुप नहीं बैठेंगी। यह उनके अधिकारों पर सीधा हमला है।”

उनके बयान ने राज्य की राजनीति को और अधिक गरमा दिया है।

BJP का पलटवार

भाजपा ने TMC के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने कहा:

“TMC डर रही है क्योंकि फर्जी और अवैध वोटर हटाए जा रहे हैं। भाजपा और TMC के बीच सिर्फ 22 लाख वोटों का अंतर है।”

भाजपा का दावा है कि SIR West Bengal List से अवैध वोट बैंक खत्म होगा, जिससे निष्पक्ष चुनाव संभव हो पाएगा।

BLO पर दबाव और विवाद

इस पूरे विवाद के बीच, बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) पर अत्यधिक दबाव की खबरें भी सामने आईं। TMC ने आरोप लगाया कि:

  • अत्यधिक काम का दबाव

  • प्रशासनिक टारगेट

  • मानसिक तनाव

के कारण कुछ BLOs ने आत्महत्या तक कर ली। पार्टी ने चुनाव आयोग पर “खून के हाथ” होने तक का आरोप लगाया।

मतदाताओं के लिए जरूरी जानकारी

अगर आपका नाम SIR West Bengal List में नहीं है, तो घबराने की जरूरत नहीं है।आप क्या करें?

  1. अपने नजदीकी BLO से संपर्क करें

  2. Form-6 या संबंधित फॉर्म भरें

  3. आधार, राशन कार्ड या पहचान पत्र जमा करें

  4. निर्धारित समय सीमा के भीतर आपत्ति दर्ज कराएं

राजनीतिक प्रभाव और चुनावी समीकरण

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि SIR West Bengal List का असर:

  • मतदाता ध्रुवीकरण

  • चुनावी रणनीति

  • वोट प्रतिशत

  • महिला मतदाताओं की भूमिका

पर गहरा पड़ सकता है।

क्या इससे चुनाव टल सकते हैं?

संवैधानिक रूप से चुनाव तभी घोषित होते हैं जब अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित हो जाती है। ऐसे में संभावना है कि:

  • फरवरी 2026 के बाद ही चुनाव की घोषणा

  • राजनीतिक दलों को तैयारी का अतिरिक्त समय

मिल सकता है।

विशेषज्ञों की राय

चुनाव विशेषज्ञों के अनुसार:

“SIR लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन पारदर्शिता और जनविश्वास बनाए रखना सबसे जरूरी है।”

निष्कर्ष

SIR West Bengal List केवल एक प्रशासनिक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनाव की दिशा और दशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कारक बन चुका है। जहां एक ओर चुनाव आयोग इसे स्वच्छ चुनाव की दिशा में कदम बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे लोकतंत्र पर चोट मान रहा है।

अब सबकी नजरें फरवरी में आने वाली फाइनल वोटर लिस्ट और उसके बाद होने वाली चुनावी घोषणा पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि sir west bengal list बंगाल की राजनीति में किसका पलड़ा भारी करती है।

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