भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों की सुरक्षा को लेकर फिर चिंता बढ़ गई है। गुरुवार को वायुसेना का मिराज 2000 ट्रेनर विमान मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक नियमित प्रशिक्षण उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। सौभाग्य से, दोनों पायलट समय रहते सुरक्षित निकलने में सफल रहे, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।
मिराज 2000 क्रैश: संभावित कारण और जांच प्रक्रिया
वायुसेना के प्रारंभिक बयान के अनुसार, दुर्घटना के पीछे तकनीकी खराबी होने की आशंका जताई जा रही है। हालाँकि, वास्तविक कारणों की पुष्टि के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी का आदेश दिया गया है। भारतीय वायुसेना का मिराज 2000 एक बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है, जिसने 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक जैसी महत्वपूर्ण सैन्य कार्रवाइयों में अहम भूमिका निभाई थी।
भारतीय वायुसेना में बढ़ती दुर्घटनाएँ: क्या कहती है रिपोर्ट?
हाल ही में संसदीय रक्षा समिति द्वारा जारी रिपोर्ट में वायुसेना में हो रही बढ़ती विमान दुर्घटनाओं को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, 2017 से 2022 के बीच वायुसेना में कुल 34 विमान दुर्घटनाएँ दर्ज की गईं।
📌 2017-18: 8 दुर्घटनाएँ
📌 2018-19: 11 दुर्घटनाएँ (सबसे अधिक)
📌 2019-20 और 2020-21: 3-3 दुर्घटनाएँ
📌 2021-22: 9 दुर्घटनाएँ
वायुसेना में दुर्घटनाओं के मुख्य कारण
रिपोर्ट के अनुसार, इन 34 दुर्घटनाओं में से: ✔️ 19 घटनाएँ पायलट की मानवीय त्रुटियों के कारण हुईं।
✔️ 9 घटनाएँ तकनीकी खराबियों के कारण हुईं।
✔️ शेष दुर्घटनाएँ पक्षी टकराव, अप्रत्याशित मौसम और विदेशी वस्तुओं की टक्कर जैसी वजहों से हुईं।
सबसे गंभीर दुर्घटनाएँ और उनकी जाँच
इनमें से सबसे घातक दुर्घटनाओं में से एक दिसंबर 2021 में एमआई-17वी5 हेलीकॉप्टर क्रैश था, जिसमें तत्कालीन रक्षा प्रमुख (CDS) जनरल बिपिन रावत समेत 12 अन्य लोगों की मृत्यु हो गई थी। जाँच में पाया गया कि यह दुर्घटना अचानक मौसम परिवर्तन और पायलट के स्थानिक भटकाव (Spatial Disorientation) के कारण हुई थी।
क्या भारतीय वायुसेना को अपने बेड़े के आधुनिकीकरण की आवश्यकता है?
शिवपुरी में हुई मिराज 2000 दुर्घटना और अन्य घटनाओं को देखते हुए, वायुसेना के आधुनिकीकरण और सुरक्षा उपायों को लेकर चिंता बढ़ रही है। हालाँकि, भारतीय वायुसेना अपनी तकनीकी क्षमताओं को उन्नत करने में लगी हुई है, लेकिन इसके साथ-साथ एविएशन सेफ्टी को प्राथमिकता देना भी आवश्यक है।
निष्कर्ष
मिराज 2000 जेट दुर्घटना और वायुसेना में लगातार बढ़ रही दुर्घटनाओं को देखते हुए, भारत को अपने लड़ाकू बेड़े के आधुनिकीकरण, तकनीकी सुधार और प्रशिक्षित पायलटों की सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता है। आने वाले समय में वायुसेना की रणनीतियाँ इस दिशा में कितनी प्रभावी होंगी, यह देखने योग्य रहेगा।
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