जस्टिस वर्मा के शपथग्रहण पर सवाल
इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकील विकास चतुर्वेदी द्वारा अधिवक्ता अशोक पांडे के माध्यम से एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के स्थानांतरण और प्रस्तावित शपथग्रहण को संविधान का उल्लंघन बताया गया है।
कांचा गच्चीबोवली में वृक्षों की कटाई पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
तेलंगाना के कांचा गच्चीबोवली क्षेत्र में वृक्षों की व्यापक कटाई पर हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा तेज़ विरोध के बीच, सर्वोच्च न्यायालय ने तत्काल प्रभाव से पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने का आदेश दिया है। यह क्षेत्र लगभग 400 एकड़ में फैला वन क्षेत्र है, जो पारिस्थितिकीय दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और ए.जी. मसीह की पीठ ने एक अखबार की रिपोर्ट के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट के न्यायिक रजिस्ट्रार को तत्काल स्थल का निरीक्षण कर 3:30 बजे तक अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय की कार्यवाही पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। उन्होंने निर्देश दिया, “तेलंगाना के मुख्य सचिव सुनिश्चित करें कि अगले आदेश तक कांचा गच्चीबोवली में किसी भी प्रकार की वृक्ष कटाई न हो।”
अवकाश के दौरान कटे पेड़, न्यायालय ने जताई नाराज़गी
न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि लम्बे सप्ताहांत का फायदा उठाकर सैकड़ों पेड़ काटे गए, जो एक गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी बताया कि इस क्षेत्र में आठ प्रकार के संरक्षित जीवों का वास है।
आईटी हब की आड़ में हरियाली पर हमला?
हैदराबाद के आईटी हब के रूप में चर्चित इस भूभाग को लेकर सरकार ने आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास की योजना बनाई है, लेकिन छात्रों और पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि इससे हरियाली और जैव विविधता को भारी नुकसान पहुंचेगा।
विश्वविद्यालय के छात्रों का उग्र आंदोलन
30 मार्च को यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद के करीब 50 छात्रों को साइबराबाद पुलिस ने हिरासत में लिया जब उन्होंने ईस्ट कैंपस में धरना दिया। 1 अप्रैल से छात्रों ने अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन और कक्षाओं के बहिष्कार की घोषणा कर दी।
उनकी मांगें स्पष्ट हैं — परिसर से पुलिस और मशीनरी को हटाया जाए, ज़मीन की वैध रजिस्ट्री की लिखित गारंटी दी जाए, कार्यकारिणी की बैठक की कार्यवाही सार्वजनिक की जाए और भूमि संबंधित सभी दस्तावेजों में पारदर्शिता बरती जाए।
भूमि विवाद की जड़ में क्या है?
तेलंगाना सरकार का दावा है कि 400 एकड़ की यह भूमि राज्य की है और उस पर आईटी हब जैसी परियोजनाएं विकसित की जाएंगी। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने दावा किया है कि इस भूमि की सीमांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और यह यूनिवर्सिटी की ही संपत्ति है।
सरकार की ओर से कहा गया है कि छात्रों को कुछ राजनीतिक दलों और रियल एस्टेट लॉबी द्वारा गुमराह किया जा रहा है। वहीं, छात्र समूह और पर्यावरण कार्यकर्ता एक स्वर में इस क्षेत्र को संरक्षित क्षेत्र घोषित करने की मांग कर रहे हैं।
निष्कर्ष
इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ संवैधानिक व्यवस्थाओं को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और युवाओं की आवाज़ को भी केंद्र में ला दिया है। एक ओर जहां न्यायपालिका संविधान की रक्षा में सक्रिय है, वहीं युवाओं की जागरूकता पर्यावरण सरंक्षण की नई दिशा को इंगित कर रही है।