International Mens Day 2025: पुरुषों को सिखाना क्यों ज़रूरी है कि असली ताक़त ‘संवेदनशीलता’ भी है?

International Mens Day 2025

international mens day और बदलते सामाजिक मूल्य

हर साल International Mens Day 2025 दुनिया भर में पुरुषों के स्वास्थ्य, उनकी भावनात्मक भलाई और समाज में उनके योगदान को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। लेकिन 2025 का यह विशेष दिन एक नए संदेश पर फोकस करता है—“संवेदनशीलता भी पुरुषों की ताक़त है।”

आज भी हमारे समाज में “मर्द रोते नहीं”, “मजबूत बनो”, “कमज़ोरी मत दिखाओ” जैसी बातें बच्चों को बचपन से सुननी पड़ती हैं। इसी वजह से लड़के भीतर ही भीतर अपनी भावनाओं को दबा लेते हैं, जो बाद में मानसिक स्वास्थ्य की बड़ी समस्याओं में बदल जाता है।

इस international mens day पर यह समझना ज़रूरी है कि भावनात्मक अभिव्यक्ति कमजोरी नहीं बल्कि वास्तविक मजबूती है।

पुरुषों में ‘ताक़त’ की पारंपरिक परिभाषा और उसका प्रभाव

हमारे समाज में दशकों से पुरुषों की ताक़त का मतलब सिर्फ़ शारीरिक शक्ति, आर्थिक जिम्मेदारी, कठोरता और भावनाओं पर नियंत्रण माना गया है।
लड़कों को सिखाया जाता है कि:

  • रोना नहीं

  • डर दिखाना कमज़ोरी है

  • हमेशा मजबूत रहो

  • अपनी परेशानियों को किसी से शेयर मत करो

इस international mens day पर हमें यह सवाल पूछना चाहिए—क्या यह परिभाषा सही है?

क्या मुश्किल वक्त में भावनाएं दाबकर रखना वाकई ताक़त है?
या फिर खुद को समझना, अपनी भावनाओं को पहचानना और उन्हें व्यक्त करने की हिम्मत रखना असली ताक़त है?

विशेषज्ञों के अनुसार, पुरुषों में भावनाओं का दबाव:

  • तनाव बढ़ाता है

  • रिश्तों में दूरी लाता है

  • मानसिक स्वास्थ्य कमजोर करता है

  • आत्मविश्वास घटाता है

यही कारण है कि पुरुषों में आत्महत्या के मामलों की संख्या महिलाओं से अधिक देखी जाती है। इस international mens day पर यह बातचीत ज़रूरी है।

संवेदनशीलता: कमजोरी नहीं, बल्कि गहरी भावनात्मक बुद्धिमत्ता

“संवेदनशील” शब्द को अक्सर “कमज़ोर” के रूप में गलत समझा जाता है।
लेकिन मनोवैज्ञानिक बताते हैं कि:

✔ संवेदनशीलता = भावनात्मक मजबूती
✔ संवेदनशीलता = आत्म-जागरूकता
✔ संवेदनशीलता = दूसरों की भावनाओं को समझना
✔ संवेदनशीलता = हेल्दी कम्युनिकेशन

2025 के international mens day का मुख्य संदेश भी यही है कि संवेदनशीलता, सहानुभूति और भावनाओं को पहचानने की क्षमता पुरुषों को अधिक संतुलित, स्थिर और दयालु बनाती है।

लड़कों को बचपन में कैसे सिखाई जाती है भावनाओं को दबाने की आदत?

जब एक छोटा लड़का रोता है, तो उसे अक्सर कहा जाता है:

  • “मर्द बनो!”

  • “लड़के कमजोर नहीं होते।”

  • “रोते क्यों हो? शर्म करो!”

यह बातें बच्चों के मन पर गहरा प्रभाव डालती हैं।

वे सीख जाते हैं कि:

  • दुख जताना गलत है

  • डर जाहिर करना शर्म की बात है

  • कोई दर्द हो तो चुप रहो

  • मदद मांगना कमजोरी है

लेकिन international mens day हमें याद दिलाता है कि “भावनाएं दबाना” ना सिर्फ़ मानसिक रूप से गलत है बल्कि भविष्य में रिश्तों और आत्म-स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।

भावनाओं को न दबाकर स्वीकार करने के फायदे — मनोवैज्ञानिकों की नज़र से

आज कई पुरुष इसलिए संघर्ष करते हैं क्योंकि उन्होंने हमेशा सुना कि “मर्द को जज़्बात नहीं दिखाने चाहिए।”
हालांकि जब वे थेरेपी में जाते हैं, वे कहते हैं कि बचपन में उनकी भावनाओं को नज़रअंदाज़ किया जाता था।

भावनाएं स्वीकार करने के फायदे:

  • तनाव कम होता है

  • रिश्तों में समझ बढ़ती है

  • आत्मविश्वास सुधरता है

  • गुस्से पर बेहतर नियंत्रण होता है

  • मानसिक स्वास्थ्य स्थिर होता है

इसलिए international mens day पर हर परिवार को यह सीखना चाहिए कि भावनात्मक बातचीत का माहौल घर में कैसे बनाया जाए।

घर पर कैसे सिखाएं कि ‘संवेदनशीलता’ भी ताक़त है?

मनोवैज्ञानिक बताते हैं कि बच्चों में भावनात्मक संतुलन घर से ही शुरू होता है।

माता-पिता इन वाक्यों का उपयोग कर सकते हैं:

  • “तुम्हारा दुख समझ सकता हूँ।”

  • “गुस्सा आना ठीक है, चलो बात करते हैं।”

  • “तुम जैसा महसूस कर रहे हो, वह सामान्य है।”

  • “मैं यहाँ हूँ, तुम मुझसे बात कर सकते हो।”

ऐसे वाक्य बच्चों को बताते हैं कि उनकी भावनाएं मान्य हैं। यही संदेश international mens day फैलाने की कोशिश करता है।

पुरुषों में भावनात्मक दमन के परिणाम

भावनाओं को दबाने की आदत इन समस्याओं को जन्म देती है:

  • भावनात्मक दूरी

  • डिप्रेशन

  • गुस्से की समस्या

  • रिलेशनशिप में टूटन

  • दूसरों को समझने में कठिनाई

  • आत्महत्या का बढ़ता जोखिम

आज international mens day 2025 पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य की बात करने का एक बड़ा अवसर है।

पुरुषों की मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियाँ जिन्हें समाज अनदेखा करता है

पुरुष:

  • काम का दबाव

  • आर्थिक जिम्मेदारियां

  • परिवार की उम्मीदें

  • भावनाएं व्यक्त न कर पाने की आदत

  • अकेलापन

इन सबके कारण मानसिक रूप से संघर्ष करते हैं लेकिन बोल नहीं पाते।

इसलिए international mens day का असली उद्देश्य पुरुषों की भावनाओं को आवाज़ देना है।

भावनात्मक संतुलन कैसे लाएं? व्यावहारिक सुझाव

✔ 1. भावनाओं को नाम देना सीखें

गुस्सा, दुख, शर्म, तनाव — इनका नाम जानना ही आधी समस्या हल कर देता है।

✔ 2. भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें

दोस्त, पार्टनर, परिवार या थेरेपिस्ट — किसी से भी खुलकर बात करना मददगार होता है।

✔ 3. मेडिटेशन और जर्नलिंग करें

यह पुरुषों को अपनी भावनाओं को समझने में मदद करता है।

✔ 4. मदद मांगने में हिचकें नहीं

मदद मांगना कमजोरी नहीं, परिपक्वता है।

international mens day 2025 का संदेश

इस वर्ष international mens day का मुख्य थीम है:
“Men’s Strength Lies in Emotional Sensitivity.”

इस संदेश का मतलब है:

  • संवेदना ताक़त है

  • भावनाएं मानवता का हिस्सा हैं

  • मर्द होना = दयालु होना

  • मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल महत्वपूर्ण है

निष्कर्ष: एक संवेदनशील, संतुलित और स्वस्थ समाज की ओर

इस international mens day पर यह समझना ज़रूरी है कि लड़कों और पुरुषों की सबसे बड़ी ताक़त है अपनी भावनाओं को स्वीकार करना।

अगर हम लड़कों को सिखाएं कि रोना, डरना, दुखी होना या संवेदनशील होने में कोई शर्म नहीं है —
तो हम एक ऐसे समाज का निर्माण करेंगे:

  • जहाँ पुरुष मानसिक रूप से स्वस्थ होंगे

  • जहाँ भावनात्मक संचार मजबूत होगा

  • जहाँ रिश्ते बेहतर होंगे

  • जहाँ संवेदनशीलता को सम्मान मिलेगा

संवेदनशीलता कमजोरी नहीं —
👉 बल्कि आत्म-जागरूकता, बुद्धिमत्ता और वास्तविक ताक़त का प्रतीक है।

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