Thursday, April 3, 2025
Homeअंतरराष्ट्रीय समाचारड्रैगन-हाथी की युगलबंदी: भारत-चीन संबंधों को प्रगाढ़ बनाने पर शी जिनपिंग का...

ड्रैगन-हाथी की युगलबंदी: भारत-चीन संबंधों को प्रगाढ़ बनाने पर शी जिनपिंग का जोर

भारत और चीन ने अपने राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ पर एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं। दोनों देशों के नेताओं ने सहयोग को मजबूत करने, रणनीतिक विश्वास बढ़ाने और सीमा पर शांति बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। यह चर्चा रूस के कज़ान में हुए पिछले शिखर सम्मेलन के दिशा-निर्देशों के तहत हुई।

भारत-चीन के बीच ‘ड्रैगन-हाथी’ नृत्य की संकल्पना

बीजिंग और नई दिल्ली के बीच संबंधों को एक संतुलित और सामंजस्यपूर्ण साझेदारी के रूप में देखना चाहिए। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संदेश देते हुए कहा कि दोनों राष्ट्रों को आपसी सहयोग बढ़ाते हुए ‘ड्रैगन-हाथी तांडव’ की तरह एक लयबद्ध साझेदारी स्थापित करनी चाहिए। यह विचार दोनों देशों के प्रतीक जीवों – ड्रैगन और हाथी – की एकजुटता को दर्शाता है।

शी जिनपिंग ने आगे कहा कि दोनों देशों को निकट सहयोग और आपसी विश्वास को बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए।

संबंधों में सुधार के संकेत

राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने शुभकामना संदेशों का आदान-प्रदान किया। यह तब हुआ जब हाल के वर्षों में, विशेष रूप से 2020 में हिमालयी सीमा विवाद के बाद, दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण रहे थे।

शी जिनपिंग और द्रौपदी मुर्मू के अलावा, चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी औपचारिक संदेशों का आदान-प्रदान किया।

वैश्विक दक्षिण के दो प्रमुख स्तंभ

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और चीन दोनों ही प्राचीन सभ्यताएं हैं तथा वैश्विक दक्षिण के महत्वपूर्ण विकासशील देश हैं।

उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि दोनों देशों के बीच सहयोग लाभदायक रहा है और एक मजबूत साझेदारी ही दोनों के उज्जवल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगी।

गुओ ने स्पष्ट किया कि चीन रणनीतिक विश्वास को मजबूत करने और बहुआयामी सहयोग को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भारत-चीन संबंधों को दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता पर बल दिया।

कज़ान शिखर सम्मेलन की दिशा में आगे बढ़ता भारत-चीन संबंध

गुओ ने पिछले वर्ष रूस के कज़ान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और शी जिनपिंग की महत्वपूर्ण बैठक को याद किया। उन्होंने कहा कि इस बैठक में लिए गए निर्णयों के आधार पर भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

सीमा शांति और वैश्विक मुद्दों पर संवाद की आवश्यकता

चीनी प्रवक्ता ने सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर आपसी संवाद बढ़ाने के महत्व को रेखांकित किया। उनका कहना था कि दोनों देशों के संबंधों की स्थिरता के लिए यह अनिवार्य है कि सीमा पर तनाव को नियंत्रित किया जाए।

75वीं वर्षगांठ पर विशेष आयोजन की योजना

गुओ ने संकेत दिया कि भारत और चीन इस ऐतिहासिक अवसर को द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए उपयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जल्द ही विभिन्न राजनयिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों की घोषणा की जाएगी।

लद्दाख गतिरोध के बाद संबंधों को सामान्य करने की कोशिश

पिछले वर्ष मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद, दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय वार्ताएं हुईं।

  • सीमा वार्ता: विशेष प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई।

  • विदेश सचिव स्तर की वार्ता: भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने बीजिंग की यात्रा कर संबंधों को पुनः पटरी पर लाने के प्रयास किए।

सीमा विवाद पर कूटनीतिक चर्चाएं जारी

25 मार्च को बीजिंग में कूटनीतिक वार्ता आयोजित की गई, जिसमें सीमा प्रबंधन और पारस्परिक सहयोग पर चर्चा हुई।

  • इस वार्ता में सीमापार नदियों के मुद्दे और कैलाश मानसरोवर यात्रा को पुनः शुरू करने पर भी विमर्श हुआ।

  • डब्ल्यूएमसीसी (वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन) बैठक में विशेष प्रतिनिधियों के बीच दिसंबर में हुई वार्ता के निष्कर्षों को आगे बढ़ाने पर विचार किया गया।

संबंध सुधारने के लिए नई पहलें

इसके बाद, भारतीय विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव गौरंगलाल दास और चीनी विदेश मंत्रालय के लियू जिनसॉन्ग के बीच बैठक हुई। इस वार्ता का उद्देश्य था –

  • सीधे हवाई मार्गों को पुनः शुरू करना।

  • कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने की संभावनाओं पर चर्चा करना।

नए संवाद तंत्र की बहाली

भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि दोनों देशों के बीच धीरे-धीरे संवाद तंत्र को बहाल किया जाएगा। यह प्रक्रिया पारस्परिक चिंताओं को दूर करने और द्विपक्षीय संबंधों को अधिक स्थिर बनाने में सहायक होगी।

निष्कर्ष

भारत और चीन के संबंधों में सुधार के संकेत स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं। रणनीतिक वार्ताओं, कूटनीतिक पहलों और उच्च-स्तरीय बैठकों के माध्यम से दोनों देश आपसी विश्वास को पुनः स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं।

‘ड्रैगन-हाथी की युगलबंदी’ केवल एक रूपक नहीं, बल्कि एक मजबूत और संतुलित सहयोग की ओर संकेत करता है। अगर दोनों देश सीमा विवादों को पीछे छोड़कर आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाते हैं, तो इससे न केवल दक्षिण एशिया बल्कि पूरे वैश्विक परिदृश्य में स्थिरता आएगी।

ABHISHEK KUMAR ABHAY
ABHISHEK KUMAR ABHAY
I’m Abhishek Kumar Abhay, a dedicated writer specializing in entertainment, national news, and global issues, with a keen focus on international relations and economic trends. Through my in-depth articles, I provide readers with sharp insights and current developments, delivering clarity and perspective on today’s most pressing topics.
RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments