Thursday, April 3, 2025
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नवरात्रि के चौथे दिन कैसे करें मां कुष्मांडा की पूजा

कल नवरात्रि का चौथा दिन है। नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा होती है इस दिन चौकी पर लाल रंग के या पीले रंग के वस्त्र बिछाकर मां की स्थापना की जाती है मां कुष्मांडा को धन और बल देने वाली कहा जाता है। कहते हैं की मां कुष्मांडा की पूजा करने से वैभव और शक्ति प्राप्त होती है कुष्मांडा मां को ब्राह्मण रक्षक मां भी कहा जाता है। मां कुष्मांडा को विद्या और ज्ञान देने वाली देवी कहा जाता है इसलिए विद्यार्थियों को मां कोकूष्मांडा की पूजा अवश्य करनी चाहिए।

आईए जानते हैं मां कुष्मांडा की पूजा विधि:

कैसा है मां कुष्मांडा का स्वरूप

मां कुष्मांडा शेर पर सवारी करती है उनकी आठ भुजाओं में कमंडल, कलश, कमल, सुदर्शन चक्र, अमृत कलश, गदा और जप माला है। मां कुष्मांडा का नाम कुष्मांडा क्यों पड़ा इसका भागवत पुराण में वर्णन है। भागवत पुराण में कहा गया है की मां कुष्मांडा ने अपनी मुस्कान से ब्रह्मांड रचा है इसीलिए उन्हें कुष्मांडा का नाम दिया गया है। कहां जाता है की मां कुष्मांडा ने अपनी हंसी से संसार को प्रकाश दिया है उनके प्रकट होने से पहले विश्व में अंधकार था जिसे उन्होंने अपनी हंसी से दूर किया। मां कुष्मांडा के अंदर सूर्य के ताप को सहन करने की शक्ति है इसलिए भक्त उनकी पूजा शक्ति व ऊर्जा के लिए करते हैं। विद्यार्थी उनकी पूजा बुद्धि वर्धन के लिए करते हैं।

मां कुष्मांडा को क्या भोग लगाया जाता है

मां कुष्मांडा को प्रसन्न करने के लिए पेठे से बनी मिठाई भोग में लगाई जाती है। पेठे से बनी मिठाई में केसर डालकर या पीले रंग के केसर वाला पेठा कुष्मांडा मां को भोग में लगाया जाता है इस दिन मालपुआ का भोग भी मां को प्रिय है। प्राचीन काल में बलि पूजा प्रचलन में थी इसे रोक कर अब कुछ लोग पेठे की बलि भी देते हैं। इसके अतिरिक्त मां कुष्मांडा को बताशे का भोग भी लगाया जाता है।

मां कुष्मांडा की पूजा

मां कुष्मांडा का पूजा मंत्र, बीज मंत्र और ध्यान मंत्र

मां कुष्मांडा की पूजा करने के लिए ओम कुष्मांमांडये नमः मंत्र का जप किया जाता है। भक्त को 108 बार ओम कुष्मांडये नमः मंत्र का जाप करना चाहिए। मां कुष्मांडा की पूजा के लिए बीज मंत्र कुष्मांडा एं ही देव्यै नमः है। मां कुष्मांडा के ज्ञान के लिए ध्यान मंत्र है या देवी सर्वभूतेषु मां कुष्मांडा रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।

मां कुष्मांडा की पूजाविधि

मां कुष्मांडा की पूजा करने के लिए नवरात्रि के चौथे दिन हमें स्नान करने के बाद ध्यान और संकल्प करके पूजा की चौकी पर विराजमान मां दुर्गे को अर्पण करना चाहिए अगर हमने 9 दिन के लिए दुर्गे मां को चौकी पर विराजमान किया है तो हर दिन हम इस स्वरूप में मां की पूजा कर सकते हैं लेकिन अगर हम रोज 9 दिन तक मां को विराजमान करते हैं तो हमें चौथे दिन चौकी रखने की जगह पर सफाई करके गंगाजल छिड़ककर चौकी विराजमान करनी चाहिए चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बेचकर मां की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए। मां की प्रतिमा स्थापित करते समय मां कुष्मांडा का ध्यान करें।

मां का ध्यान करने के बाद मां को पुष्प और फल अर्पित करें। मां का भोग मालपुआ पेठा जो भी आपने मन से सोचा हो वह मां को अर्पित करें। अगर आप हवन करते हैं तो सबसे पहले गंगाजल से लोटे को और फिर हवन कुंड को शुद्ध करें उसके बाद खुद आचमन करें। पहले लोंग अर्पित करें। लौंग अर्पित करते समय दो दो लौंग यानी कि एक जोड़ा लंगूर बालवीर को अर्पित करें और फिर दुर्गे मां को अर्पित करें उसके बाद हवन करें। हवन जैसा आप रोज करते हैं वैसा तो करे ही उसके बाद आपकूष्माण्डा मां के पूजा मंत्र बीज मंत्र और ध्यान मंत्र का भी जप करें। कूष्माण्डा मां के नाम की अग्यारी भी हवन कुंड मेंअवश्य डालें। सबसे अंत में अपराध प्रार्थना करके सारी बची हुई सामग्री हवन कुंड में डाल दे उसके बाद मां की आरती करें। दुर्गा चालीसा का पाठ करें।

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