Friday, March 28, 2025
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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की भी सीमा होनी चाहिए’: एकनाथ शिंदे ने कुणाल कामरा विवाद पर दी प्रतिक्रिया

शिंदे ने किया शिवसैनिकों के तोड़फोड़ का बचाव

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा के हालिया विवादित बयान पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “हम व्यंग्य को समझते हैं, लेकिन इसकी भी एक सीमा होनी चाहिए।”

कुणाल कामरा ने हाल ही में एक शो के दौरान बिना नाम लिए शिंदे पर परोक्ष रूप से कटाक्ष किया था। उन्होंने हिंदी फिल्म ‘दिल तो पागल है’ के गाने को मॉडिफाई कर शिंदे को ‘गद्दार’ (देशद्रोही) कहने जैसा तंज कसा था। उनके इस कथन के बाद शिवसेना कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध जताया।

‘यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं, किसी के लिए काम करना है’

शिंदे ने आगे कहा कि कामरा का यह कथन “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” नहीं, बल्कि किसी विशेष एजेंडे के लिए काम करने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह “किसी के खिलाफ बोलने के लिए सुपारी लेने” जैसा है।

शिंदे ने यह भी कहा कि कामरा पहले भी प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट, पत्रकार अर्नब गोस्वामी और कुछ उद्योगपतियों पर टिप्पणी कर चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह सच में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, या फिर यह किसी विशेष विचारधारा के तहत किया जा रहा है।

शिवसेना कार्यकर्ताओं ने किया कॉमेडी क्लब पर हमला

कामरा के इस कथन के बाद शिवसेना कार्यकर्ताओं ने उस कॉमेडी क्लब पर हमला कर दिया जहां यह शो आयोजित किया गया था। मुंबई पुलिस ने इस मामले में कई शिवसेना कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया और गिरफ्तार भी किया।

शिंदे ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “दूसरे व्यक्ति को भी एक स्तर बनाए रखना चाहिए, अन्यथा, किसी भी कार्रवाई की प्रतिक्रिया होती ही है।” उन्होंने यह स्पष्ट किया कि हर किसी को अपनी सीमा का ध्यान रखना चाहिए।

शिवसेना कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज

इस मामले में खार पुलिस स्टेशन में लगभग 19 शिवसेना नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इन पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं—132, 189(2), 189(3), 190, 191(2), 324(5), 324(6), 223, 351(2), 352, 333, 37(1), 135, और महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धाराएं 37(1) और 135 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

कुणाल कामरा का जवाब

कुणाल कामरा ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता केवल सत्ता में बैठे लोगों की प्रशंसा तक सीमित नहीं हो सकती। उन्होंने साफ किया कि वे अपने बयान पर माफी नहीं मांगेंगे।

उन्होंने कहा, “मुझे सार्वजनिक हस्तियों पर व्यंग्य करने का अधिकार है, और मैं इसे जारी रखूंगा। मैं कानूनी अधिकारियों के साथ सहयोग करने को तैयार हूं यदि कोई भी कानूनी कार्रवाई की जाती है।”

‘कॉमेडी क्लब पर हमला अनुचित’

कामरा ने उस कॉमेडी क्लब पर हमले की भी निंदा की जहां उनका शो रिकॉर्ड किया गया था। उन्होंने कहा, “हैबिटेट (या कोई अन्य स्थान) मेरी कॉमेडी के लिए जिम्मेदार नहीं है, न ही उसके पास यह शक्ति है कि वह यह तय करे कि मैं क्या कहूं या करूं। न ही किसी राजनीतिक दल को यह अधिकार है।”

उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, “किसी कॉमेडियन के शब्दों से नाराज होकर किसी वेन्यू पर हमला करना उतना ही बेतुका है जितना कि टमाटरों से भरे ट्रक को पलट देना, क्योंकि आपको परोसा गया बटर चिकन पसंद नहीं आया।”

निष्कर्ष

यह विवाद महाराष्ट्र की राजनीतिक हलचल को और तेज कर सकता है। एक ओर जहां शिवसेना और राज्य सरकार ने इसे ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा’ से जोड़ दिया है, वहीं दूसरी ओर, कामरा ने इसे स्वतंत्र विचार और सत्ता की आलोचना करने के अधिकार के रूप में पेश किया है। अब देखना यह होगा कि इस मामले में आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाते हैं।

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