भारतीय क्रिकेट में अगर किसी दिग्गज का नाम युवा खिलाड़ियों को तराशने के लिए जाना जाता है, तो उसमें युवराज सिंह (Yuvraj Singh) सबसे आगे हैं। मैदान पर अपने जुझारू अंदाज़ और बाहर खिलाड़ियों को निखारने की सोच के लिए मशहूर युवराज ने हाल ही में Shubman Gill और abhishek sharma को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि इन दोनों खिलाड़ियों के साथ उन्होंने Covid से पहले ही काम करना शुरू कर दिया था, और आज जो सफलता ये खिलाड़ी हासिल कर रहे हैं, उसके पीछे सालों की मेहनत और सही मार्गदर्शन है।
युवराज सिंह ने यह बातें इंग्लैंड के पूर्व कप्तान Kevin Pietersen के साथ बातचीत में कहीं, जहां उन्होंने भारतीय क्रिकेट के भविष्य, युवा खिलाड़ियों की मानसिकता और प्रोसेस-बेस्ड अप्रोच पर खुलकर चर्चा की।
युवराज सिंह: सिर्फ खिलाड़ी नहीं, एक मेंटर
युवराज सिंह को भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे बड़े मैच-विनर्स में गिना जाता है। लेकिन रिटायरमेंट के बाद उन्होंने खुद को सिर्फ एक एक्स-क्रिकेटर तक सीमित नहीं रखा, बल्कि युवा खिलाड़ियों के मेंटल और टेक्निकल डेवलपमेंट पर काम किया।
युवराज का मानना है कि टैलेंट हर खिलाड़ी में होता है, लेकिन उसे पहचानना, उस पर भरोसा करना और सही दिशा में मेहनत करना ही असली फर्क पैदा करता है। Shubman Gill और abhishek sharma इसकी सबसे बड़ी मिसाल हैं।
Shubman Gill को लेकर युवराज सिंह का बड़ा बयान
युवराज सिंह ने बातचीत के दौरान कहा:
“मैंने इन लड़कों के साथ Covid से ठीक पहले काम करना शुरू किया था। Shubman Gill शुरू से ही मुझसे एक कदम आगे लगते थे। उन्होंने भारत के लिए दो मैच पहले ही खेल लिए थे और मैं साफ देख सकता था कि वो औसत क्रिकेटर से चार गुना ज्यादा मेहनत करते हैं।”
युवराज के मुताबिक, Shubman Gill की सबसे बड़ी ताकत उनकी सीखने की इच्छा है। जब भी उन्हें कोई तकनीकी या मानसिक सलाह दी जाती, वह उसे बिना किसी झिझक के अपनाते।
मेहनत ही Shubman Gill की असली पहचान
युवराज ने कहा कि Gill की सफलता का सबसे बड़ा कारण उनका वर्क एथिक है। वह सिर्फ खेलना नहीं चाहते, बल्कि हर दिन खुद को बेहतर बनाना चाहते हैं।
“मैं जो भी सलाह देता, वो खुशी-खुशी उसे अपनी बल्लेबाज़ी में उतारते। यही वजह है कि आज वो जहां हैं, वहां पहुंचे हैं।”
आज Shubman Gill भारतीय क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में एक अहम नाम बन चुके हैं। उनकी तकनीक, संयम और मैच-अवेयरनेस उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है।
Test कप्तानी और ऐतिहासिक उपलब्धि
Rohit Sharma के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद, Shubman Gill को भारतीय टेस्ट टीम की कप्तानी सौंपी गई। महज 26 साल की उम्र में यह जिम्मेदारी मिलना अपने आप में बड़ी बात है।
Gill ने अपनी पहली टेस्ट सीरीज़ में कप्तान के तौर पर शानदार प्रदर्शन किया और Anderson–Tendulkar Trophy में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ बने।
सीरीज़ के अहम पॉइंट्स:
-
भारत ने पहला टेस्ट हारने के बाद ज़ोरदार वापसी की
-
सीरीज़ 2–2 से बराबर की
-
Gill ने कप्तान और बल्लेबाज़ दोनों रूप में नेतृत्व किया
इसके बाद उन्हें वनडे टीम का कप्तान भी नियुक्त किया गया, जो उनके करियर की एक और बड़ी छलांग मानी जा रही है।
abhishek sharma: भरोसे और प्रोसेस की जीत
जहां Shubman Gill को लेकर युवराज सिंह ने मेहनत की बात की, वहीं abhishek sharma के संदर्भ में उन्होंने Self-Belief (खुद पर भरोसा) को सबसे अहम बताया।
युवराज ने कहा:
“Abhishek के साथ मैंने एक प्रोसेस तय किया। मैंने उससे कहा – अगर तुम चार साल तक इस प्रोसेस को फॉलो करोगे, तो भारत के लिए खेलोगे। IPL के बारे में मत सोचो, सिर्फ इंडिया के लिए खेलने का सपना देखो।”
चार साल, तीन महीने और भारत के लिए डेब्यू
युवराज सिंह के मुताबिक, abhishek sharma ने बिल्कुल वही किया जो उनसे कहा गया था। उन्होंने ध्यान भटकने नहीं दिया, लगातार खुद पर काम किया और नतीजा ये हुआ कि:
-
ठीक 4 साल और 3 महीने बाद
-
abhishek sharma ने भारत के लिए डेब्यू किया
युवराज का कहना है कि कई खिलाड़ी अपनी प्रतिभा को पहचान नहीं पाते, लेकिन Abhishek उनमें से नहीं थे।
“कुछ खिलाड़ी नहीं समझ पाते कि उनमें कितना टैलेंट है, लेकिन Abhishek समझता था। अगर आप प्रोसेस फॉलो करते हैं, तो रिज़ल्ट खुद-ब-खुद सामने आता है।”
2025: abhishek sharma का सुनहरा साल
साल 2025 abhishek sharma के करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उन्होंने T20 इंटरनेशनल क्रिकेट में जो प्रदर्शन किया, उसने उन्हें विश्व क्रिकेट में एक नई पहचान दिला दी।
T20I आंकड़े (2025):
-
मैच: 21
-
रन: 859
-
औसत: 42.95
-
भारत के लिए सबसे ज्यादा रन
इतना ही नहीं, abhishek sharma इस समय ICC Men’s T20I Batter Rankings में नंबर 1 स्थान पर हैं।
abhishek sharma की बल्लेबाज़ी क्यों है खास?
abhishek sharma की बल्लेबाज़ी में आक्रामकता और समझदारी का बेहतरीन संतुलन देखने को मिलता है। वह:
-
पावरप्ले में तेजी से रन बनाते हैं
-
मिडिल ओवर्स में पारी को संभालते हैं
-
बड़े शॉट खेलने से नहीं डरते
उनकी सबसे बड़ी खासियत है – मैच की स्थिति के अनुसार खुद को ढालना, जो उन्हें एक परिपक्व T20 बल्लेबाज़ बनाती है।
युवराज सिंह की कोचिंग फिलॉसफी
युवराज सिंह सिर्फ तकनीक पर नहीं, बल्कि खिलाड़ी की मेंटल स्ट्रेंथ पर भी काम करते हैं। उनका मानना है कि:
-
क्रिकेट सिर्फ स्किल का खेल नहीं
-
यह धैर्य, आत्मविश्वास और अनुशासन का खेल है
Shubman Gill और abhishek sharma दोनों ही युवराज की इसी सोच के उदाहरण हैं।
भारतीय क्रिकेट का उज्ज्वल भविष्य
आज जब भारतीय क्रिकेट नई पीढ़ी के हाथों में जा रहा है, तो Shubman Gill और abhishek sharma जैसे खिलाड़ी यह भरोसा दिलाते हैं कि आने वाले सालों में टीम इंडिया मजबूत हाथों में रहेगी।
-
Gill टेस्ट और वनडे में लीडरशिप का चेहरा बन रहे हैं
-
abhishek sharma T20 क्रिकेट में भारत की सबसे बड़ी ताकत बन चुके हैं
निष्कर्ष: मेहनत, भरोसा और सही मार्गदर्शन
युवराज सिंह की यह कहानी सिर्फ दो खिलाड़ियों की नहीं, बल्कि उस सोच की है जो प्रोसेस पर भरोसा करना सिखाती है। Shubman Gill और abhishek sharma की सफलता यह साबित करती है कि:
-
टैलेंट जरूरी है
-
लेकिन मेहनत उससे भी ज्यादा जरूरी है
-
और सही मेंटर मिल जाए, तो रास्ता आसान हो जाता है
आज जब abhishek sharma ICC रैंकिंग में नंबर 1 हैं और Gill टीम इंडिया की कप्तानी कर रहे हैं, तो यह साफ है कि युवराज सिंह का योगदान भारतीय क्रिकेट में हमेशा याद रखा जाएगा।