Sunday, April 6, 2025
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तेजस्वी यादव का हमला: “वक्फ संशोधन विधेयक असंवैधानिक, BJP देश को बांटना चाहती है”

नई दिल्ली, 5 अप्रैल 2025 — राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता तेजस्वी यादव ने संसद में पारित वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को असंवैधानिक करार देते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर देश को सांप्रदायिक आधार पर बाँटने और असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया।

तेजस्वी यादव ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा,
“यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 26 का खुला उल्लंघन है। BJP जनता को गुमराह कर रही है, बेरोज़गारी, महंगाई और गरीबी जैसे बुनियादी मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए ऐसे विधेयक लाए जा रहे हैं।”

संसद में तीखी बहस, लेकिन विधेयक पारित

वक्फ संशोधन विधेयक को लोकसभा में 12 घंटे की लंबी बहस के बाद गुरुवार को पारित किया गया। विधेयक के पक्ष में 288 मत पड़े, जबकि 232 सांसदों ने विरोध में मतदान किया। इसके बाद शुक्रवार को राज्यसभा में भी इसे मंजूरी मिल गई, जहाँ 128 मत पक्ष में और 95 विपक्ष में पड़े। विपक्ष द्वारा प्रस्तावित सभी संशोधन खारिज कर दिए गए।

RJD ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विधेयक का पुरज़ोर विरोध किया। पार्टी के सभी सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया।

तेजस्वी का आरोप: “RSS और BJP संविधान विरोधी”

तेजस्वी यादव ने सत्तारूढ़ दल की विचारधारा पर तीखा प्रहार करते हुए कहा,
“RSS और BJP संविधान के विरोधी हैं। वे नागपुर के कानून को लागू करना चाहते हैं, जो लोकतांत्रिक भारत के लिए खतरनाक है। हमारी राजनीति सिद्धांतों और विचारधारा पर आधारित है, हमने कभी समझौता नहीं किया और न करेंगे।”

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाम लिए बिना उन्होंने कहा,
“माननीय मुख्यमंत्री की तबीयत ठीक नहीं है, इसलिए कुछ नहीं कहना चाहता। लेकिन जो दल स्वयं को धर्मनिरपेक्ष बताते हैं, उनकी सच्चाई सामने आ गई है। सत्ता की भूख ने उन्हें बेनकाब कर दिया।”

बिहार में सियासी उथल-पुथल

बिहार में विधानसभा चुनाव करीब हैं, और ऐसे समय में JD(U) को बड़ा झटका लगा है। वक्फ विधेयक पर पार्टी की भूमिका से असंतुष्ट होकर पार्टी के पाँच वरिष्ठ नेताओं ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। यह घटनाक्रम न केवल नीतीश कुमार की पार्टी के लिए चिंता का विषय है, बल्कि आगामी चुनावों में तेजस्वी यादव की स्थिति को भी मज़बूत कर सकता है।

विधेयक के मुख्य प्रावधान

केंद्र सरकार का दावा है कि यह संशोधन वक्फ संस्थानों की पारदर्शिता और प्रशासनिक क्षमता को बेहतर बनाने के लिए लाया गया है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि यह विधेयक विभिन्न हितधारकों की सलाह पर आधारित है।

विधेयक के प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:

  • वक्फ संस्थानों की राज्य वक्फ बोर्ड को दी जाने वाली अनिवार्य अंशदान को 7% से घटाकर 5% किया गया है।

  • जिन संस्थाओं की वार्षिक आय ₹1 लाख से अधिक है, उनके लिए राज्य प्रायोजित लेखा परीक्षकों द्वारा ऑडिट अनिवार्य किया गया है।

  • वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन के लिए एक केंद्रीकृत पोर्टल की स्थापना की जाएगी।

  • 2013 से पहले का प्रावधान बहाल, जिसके अनुसार जो मुसलमान कम से कम 5 वर्षों से इस्लाम का पालन कर रहे हैं, वे वक्फ में संपत्ति समर्पित कर सकते हैं।

  • महिलाओं को उत्तराधिकार का अधिकार वक्फ घोषित करने से पहले सुनिश्चित किया जाएगा, जिसमें विधवाओं, तलाकशुदा महिलाओं और अनाथ बच्चों के लिए विशेष सुरक्षा प्रावधान जोड़े गए हैं।

  • कलेक्टर रैंक से ऊपर के अधिकारी को यह अधिकार दिया गया है कि वे सरकारी ज़मीनों पर वक्फ के दावे की जांच कर सकें।

निष्कर्ष

वक्फ संशोधन विधेयक 2025, एक ओर जहां सरकार इसे पारदर्शिता और सुधार का कदम बता रही है, वहीं विपक्ष, खासतौर पर तेजस्वी यादव जैसे नेता इसे संविधान विरोधी और विभाजनकारी करार दे रहे हैं। जैसे-जैसे बिहार चुनाव नज़दीक आते जा रहे हैं, यह विधेयक राजनीतिक चर्चा और सियासी समीकरणों का केन्द्र बन चुका है।

ABHISHEK KUMAR ABHAY
ABHISHEK KUMAR ABHAY
I’m Abhishek Kumar Abhay, a dedicated writer specializing in entertainment, national news, and global issues, with a keen focus on international relations and economic trends. Through my in-depth articles, I provide readers with sharp insights and current developments, delivering clarity and perspective on today’s most pressing topics.
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