जब से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रिसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा की है तभी से पूरे विश्व में अर्थ व्यवस्था में तूफान आया हुआ है। ऐसा केवल कुछ देशों में नहीं है विश्व के सभी देश इस समय मंदी के दौर से गुजर रहे हैं। अमेरिका भी इस स्थिति से अछूता नहीं है जब से डोनाल्ड ट्रंप ने रिसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा की है तभी से अमेरिकी इंडेक्स एस एंड पी 6% से ज्यादा नीचे आ चुका है। जिसके कारण शेयर बाजार को 5 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इन परिस्थितियों को देखते हुए बड़े-बड़े अर्थशास्त्री जो बात कह रहे थे वही बातें अमेरिका के सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पाॅवेल ने कही है। जेरोम पाॅवेल ने अमेरिका द्वारा दुनिया के साथ देश पर लगाए गए नए टैरीफ पर चिंता व्यक्त की उन्होंने कहा कि इन दरों से अमेरिका में महंगाई बड़ेगी और अमेरिका की अर्थव्यवस्था के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
क्या कहा है जेरोम पाॅवेल ने
जेरोम पाॅवेल कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ से अमेरिका की अर्थव्यवस्था में मंदी बढ़ेगी और अमेरिका की ग्रोथ स्लो हो जाएगी। रिसिप्रोकल टैरिफ के कारण अमेरिका में मुद्रा स्फीति भी बढ़ जाएगी जिसके कारण महंगाई बड़ेगी। जेरोम पाॅवेल ने कहा कि अमेरिका की रेसिप्रोकल टैरिफ से फिलहाल अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है इसीलिए अभी अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व कोई एक्शन नहीं लेने वाला है। हम तब तक कोई एक्शन नहीं लेंगे जब तक की अर्थव्यवस्था के ऊपर टैरिफ का क्या प्रभाव पड़ने वाला है इसके विषय में स्पष्ट परिणाम दिखने शुरू नहीं हो जाते इस समय कई सारी बिजनेस कंपनियां अमेरिका में इन्वेस्ट नहीं कर पा रही है क्योंकि रेसिप्रोकल टैरिफ के कारण होने वाले प्रभाव का उनके बिजनेस पर क्या प्रभाव पड़ने वाला है इसके विषय में अभी कोई स्पष्टीकरण नहीं है। इस समय अमेरिका के सभी लोग, सरकार, कंपनियां फेडरल रिजर्व सभी इस समय रुके हुए हैं कोई भी नया काम हम शुरू नहीं कर रहे हैं क्योंकि रेसिप्रोकल टैरिफ से बिजनेस पर क्या प्रभाव पड़ने वाला है इसके विषय में कोई स्पष्टीकरण नहीं है। हम सभी टैरिफ से स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे जिससे हमें फैसला लेने में अधिक आसानी हो।
अमेरिकी शेयर बाजार है इस समय मंदी की चपेट में
दो नॉट फ्रॉम के रिसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा के बाद अमेरिका का बेंचमार्क इंडेक्स एसएंडपी 500 दो दिनों में 6% गिर चुका है जिसके कारण अमेरिका के शेयर बाजार की 5 ट्रिलियन डॉलर की नेटवर्थ खत्म हो चुकी है। नैस्डेक इंडेक्स दिसंबर महीने के उच्चतम स्तर से 20% नीचे चल रहा है। अमेरिकी शेयर बाजार इस समय मंदी की चपेट में है। जब से डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी प्रशासन संभाला है तब से अमेरिका के इक्विटी मार्केट की वैल्यू 9 ट्रिलियन डॉलर गिर चुकी है।
क्या फेडरल रिजर्व कम करेगा ब्याज दर?
इस समय अमेरिका की मंदी की स्थिति को देखकर अर्थशास्त्रियों को लग रहा है कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था कमजोर हो सकती है जिससे अमेरिका में कीमतें बढ़ेंगी और लोगों की नौकरी जाने का भी खतरा हो सकता है। ऐसे में अमेरिकी अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को कम कर सकता है। फेडरल रिजर्व अगर ब्याज दरों को कम ना भी कर पाए तो वर्तमान दरों को ही लागू करके स्थिति को संभालने का प्रयास कर सकता है।
भविष्य में फेडरल रिजर्व की क्या स्थिति रहने वाली है?
जहां तक फेडरल रिजर्व की स्थिति पर नजर डालें तो ऐसा लगता है कि अमेरिका का फेडरल रिजर्व अमेरिकी अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए ब्याज दरों को कम कर सकता है या यह भी हो सकता है कि इन्हीं वर्तमान ब्याज दरों को लागू किया जाए। लेकिन स्थिति को देखकर लगता है कि फेडरल रिजर्व बैंक दरों को कम करने या यथाशक्ति में रखने का प्रयास अवश्य करेगा।