कल चैत्र नवरात्रि की अष्टमी है चैत्र नवरात्रि की अष्टमी मां महागौरी को समर्पित होती है। इस दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। आईए जानते हैं मां महागौरी की पूजा की विधि शुभ मुहूर्त और भोग के विषय में
कल 5 अप्रैल को है मां महागौरी का दिन होगी अष्टमी की पूजा
कल चैत्र नवरात्रि की अष्टमी है अष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा होती है। वैसे तो कन्या पूजन का विधान अष्टमी के दिन होता है पर कुछ लोग अष्टमी के दिन भी कन्या पूजन करते हैं। इस दिन जो भक्त कन्या पूजन करते हैं। वो सुबह स्नान और देवी पूजन के बाद हवन करके कन्या पूजन कर सकते हैं। दुर्गा सप्तशती का पाठ वह भक्त शाम को भी कर सकते हैं।
कैसा स्वरूप है मां गौरी का?
मां गौरी का स्वरूप बहुत मोहक है। मां गौरी का शुभ्र वर्ण हैं। मां ने लाल किनारी वाली श्वेत साड़ी पहनी है। मां की चार बाहें है। मां ने अपने एक हाथमें त्रिशूल पकड़ा हुआ है। एक बांह में डमरु है। मां गौरी का एक हाथ अभय मुद्रा में भक्तों को आशिर्वाद देते हुए खड़ा हुआ है। मां महागौरीकी आयु आठ वर्ष मानी गई है। मां महागौरी के आभूषण श्वेत ऱग के है। मां महागौरी को श्वेताम्बर धरा भी कहा जाता है। मां की तुलना शंख, चंद्र और कुंद के पुष्प से की गई है मां को अष्ट वर्षा कहा गया है। मां गौरी का वाहन वृषभ है। मां महागौरी का एक नाम वृषभारूढा भी है। मां गौरी शांतस्वभाव की है मां गौरी की पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है सभी विघ्न बाधाएं दूर होती है।
मां महागौरी की कथा
मां महागौरी ने भगवान शिव को पाने के लिए कठिन जप किया था। भगवान शिव की तपस्या की थी। उनकी तपस्या के कारण उन्होंने लंबे समय तक व्रत रखा था जिसके कारण उनकी त्वचा काले रंग की हो गई थी और शरीर कृष्णकांत हो गया था। भगवान शिव ने जब इनकी विनय स्वीकार कर ली तब गंगाजल से मा महागौरी को पवित्र किया और मां महाकाली श्वेत वर्ण की हो गई। मां गौरी की पूजा विशेष फलदाई है मां की पूजा से भक्तों के सभी पाप दूर हो जाते हैं। मां महागौरी की पूजा अगर आप किसी विशेष तंत्र या अनुष्ठान के लिए करते हैं तो मां उसे अवश्य पूरा करती हैं।
मां महागौरी का श्लोक और पूजा विधि
श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेतांबर धराशुचिः।
महागौरी शुभंदद्यान्मामहादेव प्रमोदया।।
मां महागौरी की पूजा के लिए सबसे पहले सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान कर लें। मां को श्वेत रंग का भोग लगे मां को श्वेत वस्त्र अर्पित करें। मां महागौरी को काले चने का भोग लगाया जाता है मां को पंच मेंवे के साथफल और श्वेत मिष्ठान के साथ काले चने का भी भोग लगाएं।
अष्टमी की पूजा करने का शुभ मुहूर्त
सुबह 4:35 से 5:21 तक ब्रह्म मुहूर्त रहेगा इस समय पूजा करना सर्वोत्तम होता है। भक्ति को मानसिक शांति मिलती है और मां महागौरी भक्त की सभी इच्छायें पूरी करती है। मां महागौरी की पूजा का दूसरा मुहूर्त सुबह 4:58 से 6:07 तक रहेगा। मां महागौरी की पूजा का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:59 से 12:49 तक रहेगा। मां महागौरी की पूजा का विजय मुहूर्त दोपहर 2:30 से दोपहर 3:30 तक रहेगा।
मां महागौरी का प्रिय पुष्प, प्रिय भोग और शुभ रंग
मां महागौरी का प्रिय पुष्प रातकी रानी व सभी श्वेत पुष्प हैं। मां महागौरी की पूजा राहु दोष से मुक्ति पाने के लिए की जाती है।
मां महागौरी का प्रयोग काले चने और हवा होने के साथ सफेद रंग के मिष्ठान नारियल के लड्डू, मखाने की, चोलाई की, समा की खीर व फल है। मां का शुभ रंग श्रेत और गुलाबी है।