“अधिकारियों को सुरक्षा की कोई परवाह नहीं, वे सिर्फ केबिन में बैठते हैं” – पार्किंग ऑपरेटर
गुरुवार को पुणे के एक व्यस्त बस स्टेशन पर सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और नागरिकों ने उग्र विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन “स्त्री मुक्ति लीग” के नेतृत्व में हुआ, जिसमें एक युवा महिला के साथ हुए कथित दुष्कर्म के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठी। प्रदर्शनकारियों ने “न्याय दो, सुरक्षा दो!” के गगनभेदी नारे लगाए, जिससे पूरा बस स्टेशन गूंज उठा।
अधिकारियों की लापरवाही पर फूटा गुस्सा
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए स्त्री मुक्ति लीग की संयोजिका स्वप्नजा लिमकर ने कहा,
“महिलाओं के खिलाफ अपराध खतरनाक दर से बढ़ रहे हैं। स्कूल, कॉलेज, सड़कें, अस्पताल, यहां तक कि घर भी अब सुरक्षित नहीं रहे। यह पितृसत्तात्मक सोच का परिणाम है, जो अपराधियों को बचाने का काम करती है। हम तत्काल और कठोर कानूनी कार्रवाई, गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस के इस्तीफे, और बस स्टेशन प्रशासन व पुलिस की जवाबदेही की मांग करते हैं।”
अपराधी अब तक गिरफ्त से बाहर, सरकार पर सवाल
सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने पुलिस की सुस्ती पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा,
“48 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन अब तक अपराधी को गिरफ्तार नहीं किया गया। सरकार क्या कर रही है? महिलाएं सरकारी बसों को सुरक्षित मानकर सफर करती हैं, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा तंत्र की असफलता उजागर कर दी है। अगर प्रशासन हमारी रक्षा नहीं कर सकता, तो वह अपनी बुनियादी जिम्मेदारी निभाने में असफल है।”
उन्होंने महिला आयोग की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाते हुए कहा,
“हमें महिला आयोग से यह सुनने की जरूरत नहीं कि अजनबियों पर भरोसा न करें। महिलाएं पहले से ही इस कड़वी हकीकत के साथ जी रही हैं। असली सवाल यह है कि महिला आयोग हमारी सुरक्षा के लिए क्या कर रहा है?”
उन्होंने विशेष रूप से महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर पर निशाना साधते हुए कहा,
“अगर उनके अपने शहर में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, तो फिर वह क्या कर रही हैं?”
“अगर भीड़-भाड़ वाली जगह भी असुरक्षित है, तो हम कहां जाएं?”
प्रदर्शन में शामिल विश्वविद्यालय की छात्रा श्रुतिका यादव, जो रोज़ाना बस से सफर करती हैं, ने चिंता जताई,
“मैं हर दिन इस बस स्टेशन का उपयोग करती हूं। अगर यहां, जहां सैकड़ों लोग मौजूद रहते हैं, इस तरह की घटना हो सकती है, तो फिर कोई भी जगह सुरक्षित नहीं। हमारी सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?”
“अधिकारियों को सुरक्षा की परवाह नहीं” – पार्किंग ऑपरेटर
बस स्टेशन पर काम करने वाले एक पार्किंग ऑपरेटर ने प्रशासन की लापरवाही उजागर करते हुए कहा,
“यहां के अधिकारी सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं देते। वे बस एक चक्कर लगाते हैं और फिर अपने केबिन में बैठ जाते हैं। पुलिस तभी आती है जब कोई बड़ा हादसा हो जाता है।”
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक दोषियों को न्याय के कटघरे में नहीं लाया जाता और महिलाओं की सुरक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।