भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री ने एक और पड़ाव पार कर लिया है। अगस्त 2026 में इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों (EV) की खुदरा बिक्री लगातार तीसरे महीने 30,000 यूनिट के आंकड़े को पार कर गई।
तीन महीने का क्रम
आंकड़ों के अनुसार इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों की बिक्री का हालिया क्रम इस प्रकार रहा:
• जून 2026: 33,529 यूनिट — पहली बार 30,000 का आंकड़ा पार
• जुलाई 2026: 34,454 यूनिट — अब तक का उच्चतम स्तर
• अगस्त 2026: 30,000 से अधिक यूनिट
वाहन पोर्टल के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अगस्त में 30,325 इलेक्ट्रिक यात्री वाहन पंजीकृत हुए, जो पिछले साल के इसी महीने की तुलना में करीब 50 प्रतिशत अधिक है।
ब्रांडों की स्थिति
अगस्त में मास-मार्केट ईवी ब्रांडों में शीर्ष तीन स्थान टाटा मोटर्स, महिंद्रा और जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर के पास रहे।
सबसे उल्लेखनीय बदलाव चौथे स्थान पर हुआ, जहां वियतनामी कंपनी विनफास्ट ने मारुति सुजुकी को पीछे छोड़ दिया। किसी नई विदेशी कंपनी का इतनी जल्दी शीर्ष पांच में जगह बनाना भारतीय ईवी बाजार की बदलती प्रतिस्पर्धा का संकेत है।
क्या यह वृद्धि टिकाऊ है
आंकड़ों को ध्यान से देखें तो एक बात सामने आती है — जुलाई के 34,454 के शिखर के मुकाबले अगस्त में संख्या थोड़ी कम रही। यानी बिक्री ऊंचे स्तर पर स्थिर हो रही है, लेकिन हर महीने नया रिकॉर्ड नहीं बन रहा।
इसे दो तरह से पढ़ा जा सकता है। एक नजरिया यह है कि बाजार परिपक्व हो रहा है और 30,000 का स्तर अब सामान्य बन गया है। दूसरा यह कि शुरुआती तेज वृद्धि का दौर अब स्थिरता की ओर बढ़ रहा है।
असली परीक्षा त्योहारी सीजन होगा, जब भारत में वाहनों की सबसे ज्यादा बिक्री होती है।
बड़ी तस्वीर
यह वृद्धि एक बड़े बदलाव का हिस्सा है। अगस्त 2026 में ही सीएनजी, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों ने मिलकर पहली बार पेट्रोल कारों की हिस्सेदारी को पीछे छोड़ा। इसमें इलेक्ट्रिक वाहनों का हिस्सा 7.63 प्रतिशत रहा।
यानी ईवी अब भी कुल बाजार का अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा हैं, लेकिन उनकी वृद्धि दर सबसे तेज है।
खरीदने की सोच रहे हैं तो
ईवी खरीदने से पहले सबसे महत्वपूर्ण सवाल चार्जिंग का है। घर या दफ्तर में नियमित चार्जिंग की सुविधा हो तो ईवी का अनुभव अच्छा रहता है; इसके बिना यह रोजाना की परेशानी बन सकता है।
दूसरी बात वास्तविक रेंज की है। कंपनी द्वारा घोषित रेंज परीक्षण परिस्थितियों में मापी जाती है। वास्तविक उपयोग में — खासकर एसी चलाने और हाईवे पर तेज गति से चलने पर — रेंज कम रहती है। खरीद से पहले अपनी दैनिक दूरी का हिसाब लगाकर उसमें पर्याप्त गुंजाइश रखना समझदारी है।
तीसरा पहलू बैटरी वारंटी है, जो ईवी की सबसे महंगी इकाई होती है। वारंटी की अवधि और शर्तें अलग-अलग कंपनियों में भिन्न होती हैं।

