बीएन पी के कार्यकारी लीडर तारिक रहमान के बांग्लादेश वापस लौटने पर भारत की प्रतिक्रिया ,. बीजेपी के कार्यकारी लीडर तारिक रहमान 17 वर्ष बाद बांग्लादेश लौटे हैं। बांग्लादेश लौटते ही उन्होंने अपने देश के लोगों को संबोधित करते हुए एक भाषण दिया आईए जानते हैं भारत की क्या है प्रतिक्रिया बीएनपी के लीडर तारिक रहमान के भाषण के विषय में।
बीएनपी के कार्यकारी लीडर तारिक रहमान 17 वर्ष बाद लौटे बांग्लादेश
बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान 17 साल बाद वापस बांग्लादेश लौटे हैं। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटेहैं। के पिताजी और रहमान भी बांग्लादेश के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। खालिदा जिया बांग्लादेश में तीन बार प्रधानमंत्री चुनी गई। 1991 में खालिदा जिया पहली बार प्रधानमंत्री सुनी गई थी। 2001 में उनके ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए। इन्हीं आरोपों के बीच तारिक रहमान को रात को गिरफ्तार कर लिया गया। तारिक रहमान जब जमानत पर थे तभी वह लंदन चले गए थे और अब 17 साल बाद स्वयं निष्कासन लेकर अपनी निष्कासन समय को समाप्त कर वापस आए हैं।
तारिक रहमान के बांग्लादेश वापस आने पर क्या है भारत की प्रतिक्रिया
तारिक रहमान 17 साल बाद बांग्लादेश वापस आए हैं। 17 सालों में काफी कुछ उलट-पुलट हुआ है। 2001 में बांग्लादेश में 2001 में बांग्लादेश में खालिदा जिया की जगह शेख हसीना को बांग्लादेश का प्रधानमंत्री बनाया गया था। 2024 में आंदोलनकारियों ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीन को उनके पद से हटा दिया। परिस्थितियां ऐसी हुई कि शेख हसीना के ऊपर अब कई आरोप लग रहे हैं उन्हें मृत्यु दंड घोषित कर दिया गया है और शेख हसीना भारत में अपना निर्वाचन समय काट रही है। इन परिस्थितियों में तारिक रहमान बांग्लादेश वापस लौट आए हैं ऐसे में भारत के प्रतिक्रिया है देखो और इंतजार करो। खालिदा जिया के साथ भारत के संबंध कभी भी अच्छे नहीं रहे। लेकिन मोहम्मद यूनुस की जमात पार्टी के साथ भारत की बीच एक बहुत बड़ी खाई बन चुकी है। ऐसे में भारत के पास विकल्प बचता है सबसे बुरे और थोड़े बुरे में से चुनना जाहिर तौर से मोहम्मद यूनुस की जमाती पार्टी एक ऐसी पार्टी है जिसमे रोज हिंदुओं को मारा जा रहा है, जिंदा जलाया जा रहा है।
खालिदा जिया की बीएनपी पार्टी भी कुछ कम नहीं थी लेकिन जमात पार्टी से तो बेहतर ही थी। अभी हाल ही में बांग्लादेश में एक हिंदू को जिंदा मारकर जलाने पर बीएनपी पार्टी ने अपनी प्रतिक्रिया दी कि ऐसा नहीं होना चाहिए था लेकिन जमात पार्टी ने इस विषय में कुछ भी नहीं कहा जब यह मामला भारत के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय गलियारों में गूंजा तो मोहम्मद यूनुस की पार्टी ने, उन्होंने खुद को बचाने का ही प्रयास किया है।
भारत के विषय में तारिक रहमान के विचार क्या है?
तारिक रहमान बांग्लादेश लौटने से पहले ही साफ कर चुके हैं कि ना वह भारत के साथ और न हीं पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने में विश्वास रखते हैं। उन्होंने पहले ही कह दिया है न दिल्ली न ही पिंडी पहले बांग्लादेश। मोहम्मद यूनुस की सरकार पाकिस्तान के काफी करीब होती जा रही है यह वही पाकिस्तान है जिससे बांग्लादेश को भारत में अलग करवाकर एक नया राष्ट्र बनवाया था। ऐसे में तारिक रहमान का यह बयान भारत के लिए एक सकारात्मक प्रतिक्रिया ही लग रहा है। शुरू से ही चाहता है कि बांग्लादेश में लोकतंत्र स्थिरता बढ़े। बांग्लादेश में भारत लोकतंत्र अस्तित्व चाहता ही है लेकिन साथ ही साथ भारत चाहता है कि बांग्लादेश में भारत विरोधी ताकते खत्म हो और कट्टरपंथ कमजोर हो। ऐसे में तारिक रहमान का सबको साथ लेकर चलने का बयान भारत के पक्ष में ही लगता नजर आ रहा है।
तारिक रहमान का है इंडिया न्यूट्रल रुख
तारिक रहमान की बीएनपी पार्टी इस समय भारत समर्थक नहीं लग रही है लेकिन भारत विरोधी भी नहीं लग रही है। इस समय वह भारत के प्रति उदासीन नजर आ रही है। खालिदा जिया के समय से ही बीएनपी पार्टी का भारत के साथ रिश्ता सकारात्मक तो नहीं था लेकिन मोहम्मद यूनुस की पार्टी जितना कड़वाहट भर भी नहीं था ऐसे में तारिक रहमान का रुख भारत के प्रति एकदम सकारात्मक तो हो भी नहीं सकता लेकिन फिर भी भारत का यही मानना है कि वह इतने कट्टर भी नहीं होंगे जितने मोहम्मद यूनुस की जमाती पार्टी है।
तारिक रहमान ने अपने बयानों में अहिंसा और अधिकारों पर किया है विश्वास
तारिक रहमान अपने बयानों में अल्पसंख्यक अधिकारों और कानून पर जोर दे रहे हैं जो कि भारत के लिए एक सकारात्मक पहलू है। क्योंकि अगर ऐसा होता है तो हिंदू विरोधी और भारत विरोधी गतिविधियां भी कम होगी।