क्या ईरान में होगा खामनेई का सत्ता पलट, ईरान में खामनेई की सरकार 1980 से है और सरकार से अब ईरान की जनता त्रस्त होती नजर आ रही है। कल ईरान की सड़कों में काफी अधिक भीड़ इकट्ठी हुई यह भीढ सरकार के विरोध में प्रदर्शन कर रही थी यह प्रदर्शन तेहरान के ग्रैंड बाजार से शुरू हुआ। लोग एक स्वरों में नारे लगा रहे थे मुल्लाओं को ईरान छोड़ना होगा, तानाशाही मुरादाबाद, आइए जानते हैं क्या वजह है ईरान में इस जन विद्रोह की
ईरान में है खामनेई की सरकार
ईरान में 1979 के बाद ही मौलाना खामनेई की सरकार है। मौलाना खामनेई ने शाह का तख्ता पलट कर गद्दी हासिल की है। अब अब शाह के समर्थक सड़कों पर उतर आए हैं। ईरान में महंगाई 42% बढ़ चुकी है और ईरान की मुद्रा रियाल की कीमत भी डॉलर के मुकाबले दिन प्रतिदिन गिरती जा रही है। ईरान में 28 दिसंबर से यह विरोध प्रदर्शन शुरू हुए हैं इससे पहले 2022- 2023 में विरोध प्रदर्शन हुए थे लेकिन अब यह प्रदर्शन उनसे काफी बड़े हैं। 2022- 2023 में महसा अमीनी की मौत के बाद काफी अधिक प्रदर्शन हुए थे। इस समय ईरान में काफी अधिक महंगाई है, लोगों की खरीदने की शक्ति लगभग खत्म ही हो चुकी है। हर चीज आम नागरिकों की पहुंच से बाहर होती जा रही है। विरोध प्रदर्शन में बड़े व्यापारियों से लेकर छोटे व्यापारियों ने हिस्सा लिया था।
ईरान में हो चुकी है 42.5% महंगाई
ईरान की अर्थव्यवस्था दिन प्रतिदिन कमजोर होती जा रही है इस देश की मुद्रा रियाल की कीमत काफी कम हो गई है। 2025 में ही रियाल की कीमतों में कमी होना शुरू हुई थी और अब रियाल की कीमत की तुलना में $1 14 लाख रियाल के बराबर है।
क्या अमेरिका की कोई भूमिका है इस प्रदर्शन में ?
अमेरिका ईरान की बदहाली की एक बड़ी वजह है क्योंकि अमेरिका के कारण ईरान पर कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाए गए हैं। अमेरिका ईरान के साथ परमाणु समझौते से पीछे हट गया है जिसके कारण और अमेरिका की मैक्सिमम प्रेशर पॉलिसी के कारण भी ईरान की तेल के कारण होने वाली आय प्रभावित हुई है।
ईरान में लोग नारे लगा रहे हैं
ईरान में लोग प्रदर्शन करते हुए नारे लगा रहे हैं डरो मत हम सब साथ हैं। लोग नारे लगा रहे हैं मुल्लाओं को ईरान छोड़ना होगा, तानाशाही मुरादाबाद लोग खामनेई के मौलवी प्रशासन को इन सारी परेशानियों की जड़ बता रहे हैं। उनका मानना है कि सत्ता में बैठे हुए मौलवी वास्तविकता से कटे हुए हैं। मौलवी सामाजिक और व्यक्तिगत प्रतिबंध लगा रहे हैं। लोग विशेष रूप से महिलाओं की स्वतंत्रता पर लगे प्रतिबंधों से आजादी चाहते हैं।
अमेरिका का क्या कहना है इस प्रदर्शन के विषय में?
अमेरिका में पूर्व विदेश मंत्री रह चुके माइक पेंम्पिओ ने कहा इस्लामी शासन के खिलाफ सड़कों पर उतरे ईरानियों का गुस्सा कोई हैरानी की बात नहीं है। चरमपंथ और भ्रष्टाचार ने एक संभावनाशील देश को बर्बाद कर दिया है।
क्या कहना है विशेषज्ञों का ईरान की स्थिति के विषय में ?
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान में इस्लामी शासन के खिलाफ प्रदर्शन के लिए बाहरी ताकतें जिम्मेदार नहीं है बल्कि यह गुस्सा काफी लंबे समय से होती जा रही आर्थिक मंदी और कट्टरता का नतीजा है।अमेरिका अप्रत्यक्ष रूप से ईरानी शासन की आंतरिक कर्मियों को उजागर कर रहा है जिसके कारण खामनेई की सरकार परेशानियों में आ गई है।
राष्ट्रपति ने पेश की है बातचीत की पेशकश
ईरान के राष्ट्रपति मसऊद प्रदर्शनकारियों से बात करने के लिए तैयार हो गए हैं। उन्होंने कहा है कि लोगों की आजीविका उनकी मुख्य चिंता है ईरान सरकार व्यापारियों का टैक्स माफ कर रही है। ईरान की सेंट्रल बैंक के गवर्नर मोहम्मद रेजा ने अपना इस्तीफा दे दिया है।